पानी की समस्या इतनी है कि बूंद-बूंद को तरस रहा गांव, जब तक दूर नहीं होगी समस्‍या शादी नहीं करेंगी सरपंच अलका लिया फैसला…

मुंबई / महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में एक युवती ऐसी है, जिसने गांव की पानी की समस्या दूर होने तक शादी न करने का फैसला लिया है. 23 वर्षीय अलका पवार अपने गांव की सरपंच है. नंदुरबार के वीरपूर गांव में पानी की समस्या इतनी है कि लोगों को 10-10 किलोमीटर जंगल में पानी की तलाश में जाना पड़ता है. 

Alka is a Sarpanch of village

सरपंच होने के नाते अलका गांववालों के साथ जलसंधारण के कामों में जुटी थी. उसे देखने के लिए लड़के वाले आए तो अलका नें उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि जब-तक गांव में पानी लाने की उसकी जिम्मेदारी पूरी नहीं होती. तब तक वह शादी के बारे में सोच भी नहीं सकती.  

become Sarpanch in very young age

23 साल की अलका इन दिनों सुबह से ही जलसंधारण के कामों मे जुट जाती हैं. अलका का नाम महाराष्ट्र के उन गिने चुने लोगों में शामील हुआ है, जो इतनी छोटी उम्र मे सरपंच बन गए हैं. नंदुरबार का यह इलाका सबसे ज्यादा सुखा प्रभावित इलाका है. सरपंच होने के नाते गांव में पानी लाने की जिम्मेदारी अलका ने उठाई है.

engaged in water conservation work

पानी फाउंडेशन की ट्रेनिंग पूरा कर वह जब गांव में लौटी तो उसने जलसंधारण का काम हाथ में लिया. यह काम 45 दिनों का है. इतने दिनों में वह गांव के बुढ़े बुजुर्ग और बच्चों को साथ लेकर खुद जलसंधारण के काम में जुट गई हैं.

refuse from Marriage

अलका पवार ने बताया कि मेरे घर पर देखने के लिए लड़के वाले आए थे. जब मैं काम कर रही थी. छोटे बच्चों को मुझे बुलाने के लिए भेजा था. मैंने उन्हें यह कहकर वापस कर दिया कि अभी मैं नहीं आ सकती, क्योंकि 22-23 मई काम चलेगा. इसलिए अगर शादी के लिए देखना है, तो काम पूरा होने के बाद ही गांव में आएं.

Father honors daughter's decision

अलका के पिता निलसिंग पवार को अपने बेटी के इस रवैये के बारे में बिलकुल बुरा नहीं लगा. उन्होनें अपनी बेटी के इस फैसले पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि सरपंच होने के नाते अलका ने यह फैसला लिया है कि गाव पानीदार किए बिना वह शादी नहीं करेगी. मैं उसके इस फैसले का सम्मान करता हूं.

doing welfare work with villagers help

अलका के जोश को देखते हुए सभी गांव वाले जलसंधारण के कामों में जुट गए है. अपने अन्य काम से वक्त निकालकर वह अलका और अन्य गांववालों के साथ काम करते है. रिक्शा चालक दादा पवार ने बताया कि मैं तीन घंटे रिक्शा बंद कर इधर आता हूं और श्रमदान करता हूं. हमारी सरपंच अलका भी हमारे साथ होती है.

Now waiting for rain

पूरे गांव में जलसंधारण का काम जोरों पर चल रहा है. यह लोग अब बारिश का इंतजार कर रहे हैं. ताकी जब पानी बरसेगा तो जो गढ्ढे उन्होंने खोदे हैं वह पानी से भर जाएंगे और अगले साल पानी की समस्या से थोड़ी निजाद मिलेगी. zeenews.com

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