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आपदा में अवसर: लाॅकडाऊन में कोरिया के लोहार ने जुगाड़ के सामग्री से होम मेड हैमर मशीन बना डाली

00 लोहा कूटते (पीटते) समय पत्नी के हाथ में पड़े छाले तो जुगाड़ से बना दिया हेम्बर मशीन

00 छः महिने में बनाया मशीन कई बार आयी मुसीबत पर मशीन बनाने में जुटा रहा कोरिया का लोहार

00 कबाड़ से जुगाड़ तक का सफर, यू टियूब बना सहारा

00 लाॅकडाऊन का किया भरपूर उपयोग पूरे लाॅकडाऊन के दरमियान बना दि जुगाड़ू मशीन

00 आसपास के तमाम गांवों में लोहा कूटने वाले लोहारों के लिये बना मिसाल

कोरिया / छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पटना के एक लोहार ने देश में लगे लाॅकडाऊन अवधि के छः महीनों के भीतर होम मेड हैमर मशीन को बना डाला।

जहां चाह होती है वहां राह मिल ही जाती है ऐसा ही एक दृष्य देखने को मिला जहां पटना गावं के एक लोहार ने पत्नी के दर्द और मजदूरों की समस्या देखते हुये पूरे लाॅकडाऊन समयावधि में एक होम मैड लोहा पिटने वाली मशीन को बना डाला। सबसे बड़ी बात इस मशीन में यह है कि इस मशीन में सिर्फ मोटर को छोडकर पूरा सेटअप कबाड़ से जुगाड़ पर अधारित है।

आपको बता दे कि मजदूर न मिलने की स्थिति में पत्नी को भी इस कार्य मे हाथ बटाना पड़ता था जिससे पत्नी के हाथों छाले पड़ जाते थे। पत्नी के हाथों में छाला देख लोहार पति शंकर विश्वकर्मा ने होम मेड हैमर मशीन बनाई। जिस मशीन की लोहा पिटने की क्षमता इतनी अधिक है कि कम मेहनत में शंकर लोहा पिट कर एक अच्छा औजार बना देता है। उसे मेहनत भी कम लगती है।

पटना के शंकर विश्वकर्मा ने बताया कि जब मैं इस मशीन को बना रहा था कई बार इस मशीन में कमियां आती गयी मुझे समझ नहीं आता था इस कमी को कैसे दूर किया जाये पर रात भर सोचता था और यूट्यूब का भी सहारा लिया कई बार प्रयास कर लगभग छः महिने में एक ऐसी उपकरण तैयार कर पाया जिससे अब आसानी से लोहा पिटा जा सकता है। पिछले महिने भर से मैं इससे लोहा पिटने का काम कर रहा हूं और भी इसमें कुछ कमियां समझ आती है तो इसे दूर भी कर रहा हूं। इस मशीन को बनाने में लगभग 25 से 30 हजार रूपये की लागत आयी हैं। इसे और माॅडीफाई करने के लिये लगभग 20 हजार की लागत आयेगी। यदि इस मशीन में 20 हजार और लगा दिया गया तो यह स्थायी रूप से बिजली या डीजल मोटर से चलने के लिये यह मशीन पूर्णतः तैयार हो जायेगा।

शंकर लोहार की घर स्थिति है दयनीय – लोहा पिट कर अपना जिविका चलाने वाले शंकर विश्वकर्मा के साथ उनकी पत्नी रीता व 3 बच्चे रहते है। शंकर विश्वकर्मा ने बताया कि मैं अपने तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहता हूं पर आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण मेरे दो बेटे विशाल जो 12 वीं व विक्की 10 वीं पास कर पढ़ाई छोड़ दिए वहीं बिटिया आशा 10 वीं पास कर जैसे-तैसे पढ़ रही है। शंकर विश्वकर्मा 40 वर्ष अपनी पत्नी रीता के साथ कृषि संबंधी उपकरण फावड़ा, कोड़ी, कुदाल, हंसिया, नागर लोहा आदि का कार्य करता है काम कभी चला कभी बंद हो जाता है जिसके कारण रोजी रोटी का जुगाड़ भी नहीं बन पाता। पर लोहा कुटने में पत्नी का भरपूर सहयोग रहता है मगर उसके हाथ के छाले देख कर कुछ दिन लोहा पीटने के लिए एक मजदूर भी रखा मगर वह भी भाग गया, फिर दूसरा मजदूर रखा वह भी भाग गया तब मैंने यू टियूब में एक ऐसी मशीन देखी जिसे बनाने का मन मे आया और बनाने की कल्पना की जिसमें बिना मजदूर लोहे पिटने का काम हो सके। तब मैं इसके पीछे लगा और कई अड़चनों के बावजुद इस मशीन को तैयार कर इससे काम करने में सफलता पा सका।

ऐसी बनी मशीन – शंकर ने जुगाड़ से हेम्बर मशीन बनाने की कल्पना की और कबाड़ से गाड़ी का पट्टा, घिसा हुआ टायर, निहाई, जुगाड़ का मुसरा व रेम लगा दिया है। जिसमें पुरानी दो एचपी की मोटर भी लगा दी है जिससे अब हथौड़ा चलाने का काम खत्म हो गया है, शंकर अब चाहता है कि मेरे काम में उसके बच्चें व पत्नी शामिल न हो। बच्चें अपनी पढ़ाई में समय दे और पत्नी घर का काम करें। अब मैं अकेले ही इस मशीन से काम करके अपने परिवार का भरण पोषण करूं। साथ इस मशीन को वह ऐसे लोहारों को दे जो वह पैसा कमाकर अपने बच्चों को अच्छी पढ़ाई करा पाए।

धुआं न हो बनाया चिमनीनुमा भट्टा – कम पढ़ा लिखा होने के बावजुद शंकर लोहार की कल्पना शक्ति तब देखने को मिलती है जहां वह काम करता है सबसे पहले तो उसने लोहे को गर्म करने पर हो रही धुंऐ से राहत के लिये चिमनीनुमा भट्टा तैयार किया जिससे अब उसे धुंआ नहीं लगता साथ ही गर्मी से राहत लेने के लिये जहां वह काम करता है एक छोटा सा मोटर में अपनी बनायी पंखी से हवा लेने के लिये पंखा भी बना लिया। लोहा पिटते समय शंकर लोहार को अब न तो धुंआ परेशान करता है और न ही चिमनी की गर्मी शंकर लोहार अब अपना पूरा ध्यान अपनी बनायी हैमर मशीन से लोहा पिटने व लोहा को आकार देने में देता है।

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