राजनीति के शिकार कांग्रेसी नेता वेदांती तिवारी के प्रचार ने पकड़ा जोर, वेदांती और अनिल साहू में टक्कर, अनिल जायसवाल काफी पीछे

00 दो बार मिला विधानसभा का टिकट
00 इस बार नही दिया गया जिला पंचायत सदस्य का टिकट
00 अन्य प्रत्याशियों पर पड़ रहे हैं भारी

कोरिया / प्रदेश में सत्ता वापसी के बाद भी कांग्रेस में गुटबाजी खत्म होने का नाम नही ले रही है शीर्ष नेतृत्व की बात हो या मंत्रिमंडल से लेकर जिलों तक में कई मौके पर गुटबाजी स्पष्ट देखने को मिलती है।

इस बार भी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान कोरिया जिले में गुटबाजी सीधे तौर पर देखने को मिल रही है। पंचायत चुनाव वैसे तो पार्टी आधारित चुनाव नही है इसके बावजूद प्रमुख दलों द्वारा अपने समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा की जाती है उसी अनुरूप कोरिया जिला पंचायत के लिए भी पार्टी ने अपने 10 उम्मीदवारों की घोषणा की। लेकिन इसमें सबसे दिलचस्प यह देखने को मिला कि बैकुंठपुर सीट से दो बार पार्टी की टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके कांग्रेसी नेता और पीसीसी सदस्य को पार्टी ने अपना समर्थन नही दिया।

गृह क्षेत्र होने के कारण वे कुड़ेली क्षेत्र से पार्टी के समर्थन पर चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, पार्टी ने उनके स्थान पर जनपद पंचायत बैकुंठपुर के अध्यक्ष अनिल जायसवाल को अपना समर्थन दे दिया है। हालांकि नामांकन वापसी के ठीक एक दिन पहले ही पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी लेकिन इसके पूर्व ही कुडे़ली क्षेत्र से वेंदाति तिवारी और अनिल जायसवाल ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया था। पार्टी द्वारा उम्मीदवार न बनाये जाने के बाद यह कयास लगाये जा रहे थे कि वे अपना नामांकन वापिस ले सकते हैं लेकिन पार्टी के निर्णय के खिलाफ जाते हुए अंततःउन्होने अपना नामांकन वापिस नही लिया और अब वे पूरी तरह से चुनावी मैदान में उतर चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि कुड़ेली क्षेत्र सामान्य होने के कारण इस क्षेत्र से अनेक उम्मीदवार मैदान में हैं लेकिन यहां मुख्य मुकाबला वेदंांति तिवारी और भाजपा समर्थित उम्मीदवार अनिल साहू के बीच देखने को मिल रहा है। जब हमारी टीम ने कुड़ेली क्षेत्र के विभिन्न गांव का दौरा किया तो मतदाताओं का स्पष्ट रूझान वेदांति तिवारी की तरफ देखने को मिला। यहां मतदाताओं ने ही कहा कि पार्टी ने उनका टिकट काटकर धोखा किया है।

चुनावी मैदान में वेंदाति तिवारी इन दिनों सुबह से देर रात तक विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं जिन्हे बड़ी संख्या में लोगो के जनसमर्थन के साथ ही सहानुभूति भी मिल रही है। पार्टी ने इस सीट से जनपद उपाध्यक्ष अनिल जायसवाल को अपना उम्मीदवार तो बनाया है लेकिन क्षेत्र के कई बड़े कांग्रेसी नेता डंके की चोट पर पार्टी के निर्णय को अस्वीकार करते हुए वेंदाति तिवारी के साथ प्रचार अभियान में शामिल है।

चुनावी दृष्टि से कुडे़ली क्षेत्र काफी अहम माना जा रहा है, इसी सीट से पार्टी के निर्णय के खिलाफ कांग्रेसी नेता चंद्रप्रकाश राजवाड़े भी मैदान में हैं। हलांकि सभी दावेदार अपनी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं लेकिन ग्रामीणों का रूझान यदि देखा जाये तो वेदांती तिवारी की ओर ज्यादा देखने को मिल रहा है इस वजह से वर्तमान स्थिति पर देखा जाये तो यह कहा जा सकता है कि इस बार वेदांती तिवारी को हार का मुंह नही देखना पड़ेगा और चुनावी वैतरणी पार कर वे जिला पंचायत का सफर तय कर लेंगे?

वही क्षेत्र में अब यह चर्चा का विषय बन चुका है कि क्षेत्र के कई कांग्रेसी नेताओं ने षडयंत्र के तहत कुडे़ली सीट से वेंदाति तिवारी का टिकट फायनल नही होने दिया। उनके राजनैतिक कैरियर को ब्रेक करना ही ऐसे नेताओं का मकसद था, लेकिन बिना कुछ परवाह किये श्री तिवारी अब चुनावी मैदान में है। देखने पर यह मिलता है कि पार्टी ने टिकट नही दिया इसलिए क्षेत्र की जनता उनके साथ सहानुभूति के साथ खड़ी है पूरे क्षेत्र में यह चर्चा का विषय है कि अंतिम मुकाबला श्री तिवारी और भाजपा समर्थित उम्मीदवार अनिल साहू के बीच ही होना है। कई कांग्रेसियों के खुलकर वेदांती तिवारी के साथ आ जाने के कारण कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार अनिल जायसवाल को इस क्षेत्र में कार्यकर्ता खोजने में भी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है पूर्व में चुनाव लड़ने के कारण न तो वेदांती तिवारी परिचय के मोहताज हैं और न ही उन्हे कार्यकर्ता खोजने की जरूरत है इसलिए लड़ाई में वे कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार की तुलना में काफी आगे दिखाई दे रहे हैं।

वहीं वेदांति तिवारी के पक्ष में बने माहौल से जिला कांग्रेस कमेटी भी बैकफुट पर है कोई भी जिला पदाधिकारी मैदान में देखने पर भी नजर नही आ रहा है। चुनाव को अभी 15 दिन को समय शेष है लेकिन वेदांति तिवारी को मिल रहे जनसमर्थन को देखकर यह कयास लगाया जा रहा है कि वे इस बार निश्चित ही चुनावी वैतरणी पार कर लेंगे।

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