साजा पहाड़ इलाके को नेताओं ने दी सजा तो अब उन्होंने भी चुनाव बहिष्कार का लिया फैसला…

कोरिया / सत्ता जिसकी भी हो नेता मंत्री विधायक सांसद विकास के लंबे – लंबे बाते करते नही थकते। विकास की गाथा तो ऐसे सुनाते है जैसे इन्होंने विकास की गंगा बहा दी हो। गांव हो या शहर हर क्षेत्र में विकास की बाते करते दिखते है। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बया करती है।

कोरिया जिले के नगर निगम चिरमिरी के वार्ड क्रमांक 1 के मोहारी डांड, लमिगोड़ा पंचास मिल जैसे स्थानीय लोग मूलभूत सुविधाओं से बहुत दूर है जिस कारण यहाँ के रहवासियों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया है।

विकास की बाट जोह रहे चिरिमिरी नगर पालिक निगम का यह इलाका जहां के लोगो को लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व का बहिष्कार करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। जबकि देश आज 21वी सदी के युग मे जी रहा है और कोरिया जिले के चिरमिरी नगर निगम के वार्ड क्रमांक 01 के रहवासी आज भी मूल- भूत सुविधाओं जैसे रोड, बिजली, पानी के लिए तरस रहे है । यहाँ तक कि नगर निगम क्षेत्र में रहने के बाद भी आज तक यहा के लोग निगम के महापौर को ना ही देखा है और ना ही पहचानते है।

यह के लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते है और वादा कर के चले जाते है फिर पलट कर दुबारा सुध लेने भी नही आते है।

एक ओर नाला और एक ओर पहाड़ से गिरा हुआ इस क्षेत्र के लोग मूलभूत सुविधाओं से बहुत दूर है। बिजली नही होने से अंधेरे में रहने को मजबूर है पानी को व्यवस्था नही होने से नाले का पानी पीने को मजबूर है न कुआ है न हैंड पंप। स्वास्थ्य की बात करे तो यहाँ के लोगो का कहना है कि जब भी कोई बीमार पड़ता है तो उसे खाट में लादकर पर पैदल ही अस्पताल नाला पार करके आठ दस किलोमीटर लेके जाना पड़ता है। गर्ववती महिला के प्रसूता के समय भी यही समस्या आती है जिस कारण घर मे ही डिलेवरी करना पड़ता है जिससे बच्चे और माँ दोनो का जान को खतरा बना रहता है। यह के बच्चे भी स्कूल छ आठ किलोमीटर पैदल ही जाना पड़ता है और डर भी बना रहता कि की कोई जंगली जानवर का सामना ना हो जाये। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में जंगली हाथी चिता भालू अक्सर आते रहते है जिससे इनको खतरा भी बना रहता है। विधानसभा चुनाव के समय इस छेत्र के विधायक श्यामबिहारी जायसवाल प्रसाशनिक अधिकारियो को लेकर इनकी समस्या सुनने और समाधान करने पहुचे थे जिसके बाद उनकी सार्थक पहल पर सड़क बनाने का काम भी शुरू भी हुआ था, लेकिन चुनाव के बाद कुछ काम होते ही सड़क निर्माण का काम बंद करा दिया गया।

नाराजगी वार्डवासियों में साफ दिख रही है यहाँ तक कि अपना नेता चुनने भी इन्हें 6 किलो मीटर का सफर तय कर मतदान करने जान पड़ता है वो भी सड़क न होने के कारण पैदल जिस कारण पूरे के पूरे वार्डवासियों ने आगामी लोकसभा के चुनाव का बहिष्कार करने का पूरा मन बना लिया है और इस बार कोरबा लोकसभा में 23 अप्रेल को होंने वाले मतदान में वार्डवासी मतदान नही करेंगे।

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