सुस्त पड़ा कोरिया भाजपा संगठन, घर से नही निकल रहे पदाधिकारी-कार्यकर्ता, कांग्रेसी रिचार्ज, लगे जनसंपर्क में

कोरिया / आगामी 23 तारीख को देश की संसद के लिये निर्वाचन होना है, कोरबा लोकसभा में शामिल कोरिया जिले के मतदाता भी इस तारीख को वोट के माध्यम से अपना सांसद चुनने जा रहे हैं। कांग्रेस ने जहां विधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत की पत्नि श्रीमती ज्योत्सना महंत को मैदान में उतारा है तो वहीं भाजपा ने श्रमिक नेता और खाद्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष ज्योतिनन्द दुबे को उम्मीदवार बनाया है।

वर्तमान स्थिति की अगर बात की जाए तो कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार ने पूरा जोर पकड़ लिया है, विधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत से लेकर स्वयं प्रत्याशी ज्योत्सना महंत ने कोरिया जिले का दौरा कर मतदाताओं से मिलकर आशीर्वाद मांगा है। जिले के तीनों विधायक से लेकर पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। यह अलग बात है कि आज भी मोदी लहर में अपेक्षाकृत उन्हें रिस्पांस नही मिल पा रहा है लेकिन उनकी सक्रियता से लाभ अवश्य होगा यह तय है।

वहीं बात अगर भाजपा प्रत्याशी ज्योतिनन्द दुबे के बारे में किया जाए तो उन्होंने अभी तक सिर्फ एक बार ही जिला मुख्यालय का दौरा किया है। प्रत्याशी बनाये जाने के बाद श्री दुबे भाजपा कार्यालय बैकुंठपुर पहुँचे थे जहां पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलकर उन्होंने पूरी ऊर्जा के साथ मेहनत करने का आह्वान किया था। लेकिन चुनावी समय करीब आने के बाद भी जिले भर में भाजपा संगठन की सुस्ती चर्चा का विषय है। क्षेत्र में कहीं भी भाजपा कार्यकर्ता दिखाई नही दे रहे हैं सिर्फ भाजपा जिला कार्यालय में हर रोज बैठकों का दौर चल रहा है। बताया जाता है कि बीते गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक बड़े पदाधिकारी ने भी बैठक लेकर पदाधिकारियों को काम मे लगने का निर्देश दिया है।

उल्लेखनीय है कि बीते विधानसभा चुनाव में जिले में भाजपा का किला ढहने के बाद से कार्यकर्ता एकदम मायूस है। संगठन स्तर पर भी उनका हौसला बढ़ाने कोई प्रयास अब तक नही किया गया जिसका असर इस चुनाव में देखने को मिल रहा है। पार्टी सूत्र बतलाते हैं कि जो चुनावी मैनेजमेंट पिछले लोकसभा चुनाव में देखने को मिला है इस बार वैसा कुछ नही है। अभी तक न तो किसी को जिम्मेदारी दी गई है और न ही अन्य व्यवस्था, जिससे कि कार्यकर्ता नाराज है। बताया जाता है कि इस बार सारा जिम्मा भाजपा संगठन को दिया गया है लेकिन संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी अभी तक सिर्फ बैठकों तक सीमित रहकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

स्थिति देखकर लगता है कि पार्टी पदाधिकारियों ने इस सीट पर अभी से हार मान ली है जिसके कारण वे चुनावी मैदान में कहीं नजर नही आ रहे हैं। या फिर उन्हें लग रहा है वे राष्ट्रवाद और मोदी जी के चेहरे पर ही चुनाव जीत जाएंगे उन्हें मैदान में जाने की जरूरत नही है।

बहरहाल मतदाताओ का रुझान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर होने के कारण अति आत्म विश्वास में दिखाई दे रहे संगठन नेताओं को यह समझना होगा कि इस बार मुकाबला सत्ता से भी है पिछली बार इनकी सत्ता थी तब कोरिया जिले से मात्र 10 हजार की बढ़त मिली थी और कुल जीत का अंतर 5000 भी नही था। इस वजह से अब उन्हें कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है।

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