VIDEO – जोगी मठ – पुरातत्विक स्थल जहाँ भगवान जैन तीर्थांकर की 2 मूर्तियों का ये है इतिहास ?

छत्तीसगढ़ का आदिवासी बाहुल्य कोरिया जिला प्राकृतिक सौंदर्य से अटा पड़ा है। एक ओर जहॉ घने वनों की हरियाली हर किसी के मन को मोह लेती है, वही दूसरी ओर जिले के अनेक पुरातात्विक स्थल कोरिया जिले की प्रमुख विशेषता है। 

आज हम आपको एक ऐसे ही पुरातात्विक स्थल के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते है और वो है कोरिया का जोगी मठ जिसे जोगी बाबा मंदिर के नाम से भी पुकारा जाता है।   

यु तो कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत में दर्जनों की संख्या में ऐसे पुरातात्विक स्थल है जो की 6वीं 7वीं शताब्दी के है जो प्राचीन शाताब्दी इतिहास के बारे में अपनी पहचान बनाए रखे है। जिला मुख्यालय से सोनहत मार्ग पर स्थित जोगी मठ के नाम से प्रसिद्ध पुरातत्विक स्थल जहाँ भगवान जैन तीर्थांकर की 2 मुर्तिया विराजमान है। स्थानीय लोग इस स्थल को जोगी बाबा के मंदिर से पहचानते है और पुजते है। इसके अलावा यहाँ राम भक्त हनुमान की भी मुर्ति है जो आकर्षक का केंद्र है। यहाँ वर्ष 2001 से लगातार चैत्र नवरात्र में 2 दिवसीय मेला का भव्य आयोजन भी किया जाता है।   

 जोगी मठ में यह 6वीं 7वीं  शताब्दी की प्राचीन मुर्तिया है जो भगवान जैन तीर्थांकर की है। स्थानीय लोगों की माने तो जोगी मठ में सच्चे मन से मांगी गई भक्तों की सारी मनोकामनाएँ पूरी होती है। मंदिर परिसर के जमीन पर चलने से धम-धम की अजीबे आवाज भी सुनाई पड़ती है। यह मन्दिर एकांत और घने – जंगलों के मध्य में बना है की है की दूर से यह दिखाई भी नहीं पड़ता। 

 सोनहत के ग्राम कैलाशपुर घुघरा जंगल के मध्य स्थित जोगी मठ देव स्थल पुरे सरगुजा संभाग का सबसे पुराना देव स्थल व पुरातात्विक स्थल है। पर प्रशासन की उदासीनता के कारण अब ये पुरातात्विक स्थल गुमनामी के दौर से गुजर रहा है। आज इनकी पहचान प्रदेश स्तरीय तो दूर महज जिला स्तरीय भी नहीं हो पायी है। जैन धर्म के जुड़े कई लोगों को यह भी नहीं पता की जिले में भगवान जैन तीर्थांकर की कोई मूर्ति विराजमान है। 

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