हमारे देश में पहली बार होगा साइकिल पोलो लीग का आयोजन

नयी दिल्ली (भाषा) पिछले कुछ वर्षों में लीग खेलों की लोकप्रियता से प्रभावित होकर भारतीय साइकिल पोलो महासंघ (सीपीएफआई) ने देश में पहली बार साइकिल पोलो लीग का आयोजन करने का फैसला किया है जिसे 25 से 29 नवंबर तक जयपुर में कराया जायेगा। 

सीपीएफआई के अध्यक्ष रधुवेन्द्र सिंह डुंडलोद ने यहां संवाददाता सम्मेलन में लीग की जानकारी देते हुए उम्मीद जतायी इससे इस खेल की लोकप्रियता को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने शनिवार को कहा कि प्रतियोगिता के पहले सत्र में पांच टीमें भाग लेंगी जिनके बीच लीग चरण के मुकाबलों के बाद फाइनल खेला जाएगा।

उन्होंने बताया, ‘‘ पहले साइकिल पोलो लीग का आयोजन जयपुर में 25 से 29 नवंबर तक होगा जिसमें पांच टीमें भाग लेगी। इन टीमों से चार चार खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे जिसमें एक विदेशी खिलाड़ी रह सकता है। इसे अंतरराष्ट्रीय मैचों के प्रारूप में खेला जायेगा जहां साढ़े सात मिनट के चार चक्कर (क्वार्टर) होंगे। ’’

इस घोषणा के मौके पर सीपीएफआई के उपाध्यक्ष ग्रुप कैप्टन दीपक अहलुवालिया, भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) ऐ.के सिंह, एअर मार्शल पीपी बापत और सीपीएफआई के सचिव गजानन बुरडे मौजूद थे।

इस प्रतियोगिता में देश के शीर्ष 40 साइकिल पोलो खिलाड़ी के अलावा 10 विदेशी खिलाड़ी भी भाग लेंगे।

डुंडलोद ने बताया , ‘‘ सीएफआई ने इस प्रतियोगिता के लिए टीमें के पास देश के शीर्ष 40 खिलाड़ियों के अलावा 10 विदेशी खिलाड़ियों में से चुनने का मौका होगा। पहले सत्र में खिलाड़ियों के चयन के लिए बोली नहीं लगायी जाएगी और टीम का गठन इस तरह से होगा की पांचों टीमें बराबरी ही हो। ’’

लीग के विजेता को दो लाख रुपये जबकि उपविजेता को एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। लीग को अगर अच्छे प्रायोजक मिले तो इस रकम को बढ़ाया जाएगा।

डुडलोद ने बताया कि इस प्रतियोगिता का मकसद इस खेल के खिलाड़ियों को आर्थिक सुविधा देने के साथ इसकी लोकप्रियता को बढ़ना है क्योंकि यह बेहद ही सस्ता खेल है।

उन्होंने कहा, ‘‘ इस खेल के लिए गेंद के आलावा सिर्फ सामान्य साइकिल और पोलो स्टिक की जरूरत है जिसकी कीमत कम होती है।’’

साइकिल पोलो की शुरूआत 1891 में आयरलैंड में हुई थी जबकि 1908 के ओलंपिक में साइकिल पोलो का प्रदर्शन मैच रखा गया था।

अंतरराष्ट्रीय बाइसिकल पोलो महासंघ ने अब तब 12 विश्व कप आयोजन किया जिसमें आर्थिक कारणों से भारतीय टीम सात में ही भाग ले सकी है। भारत ने इसमें पांच स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीते हैं।

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