मोदी ने कहा : कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं, ट्रंप ने सहमति जताई

बिआरित्ज/लंदन (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की गुंजाइश को सोमवार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है तथा ‘‘हम किसी तीसरे देश को कष्ट नहीं देना चाहते।’’ 

मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में मीडिया से बातचीत के दौरान मोदी यह टिप्पणी की। ट्रंप ने मोदी की इस बात का तुरंत समर्थन किया जिन्होंने हाल में मध्यस्थता की पेशकश की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी पूर्व की टिप्पणियों से पीछे हटते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर समस्या का खुद समाधान कर सकते हैं।

दोनों नेता जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर और अपनी औपचारिक बैठक से पहले रातभर चली वार्ता के बाद मीडिया के समक्ष एक साथ उपस्थित हुए।

जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के भारत सरकार के फैसले के बाद मोदी और ट्रंप की यह पहली मुलाकात थी। नयी दिल्ली के इस फैसले की पाकिस्तानी नेतृत्व, खासकर वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान ने तीखी निन्दा की थी और भारत विरोधी बयान दिए थे। इससे दोनों देशों के बीच तनाव उत्पन्न हो गया।

मोदी ने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान के बीच ये सभी मुद्दे द्विपक्षीय प्रकृति के हैं और हम किसी तीसरे देश को कष्ट नहीं देना चाहते। हम द्विपक्षीय रूप से इन मुद्दों पर चर्चा कर इनका समाधान कर सकते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान 1947 से पहले साथ थे और उन्हें विश्वास है कि दोनों पड़ोसी अपनी समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान कर सकते हैं। मोदी ने कहा, ‘‘चुनावों के बाद जब मैंने प्रधानमंत्री खान से बात की तो मैंने उनसे कहा कि पाकिस्तान को गरीबी के खिलाफ लड़ना है, भारत को भी इससे लड़ना है। पाकिस्तान को अशिक्षा और बीमारी से लड़ना है और भारत को भी उनसे मुकाबला करना है…मैंने उनसे कहा कि हमें अपने लोगों के कल्याण के लिये काम करना चाहिए।’’

वहीं, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने और मोदी ने बीती रात कश्मीर के बारे में ‘‘काफी विस्तार’’ से बात की तथा उन्हें लगता है कि भारत और पाकिस्तान खुद ही इसका समाधान कर सकते हैं।

ट्रंप ने कहा, ‘‘हमने बीती रात कश्मीर के बारे में बात की, प्रधानमंत्री को वास्तव में यह लगता है कि यह (स्थिति) उनके नियंत्रण में है। उन्होंने पाकिस्तान से बात की और मुझे विश्वास है कि वे कुछ ऐसा करेंगे जो काफी अच्छा होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे दोनों (मोदी और खान) से अच्छे रिश्ते हैं तथा मैं यहां हूं। मुझे लगता है कि वे खुद ही इसे (मुद्दे का समाधान) कर सकते हैं।’’ ट्रंप की आज की टिप्पणियां उनकी पूर्व की उस टिप्पणी के बिल्कुल विपरीत है जब उन्होंने दावा किया था कि मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को कहा है। भारत ने उनके इस दावे का कड़ा विरोध किया था। ट्रंप ने हालिया विगत में एक से अधिक बार भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी।

भाजपा प्रवक्ता जी वी एल नरसिंह राव ने नयी दिल्ली में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बैठक में पाकिस्तान के दुष्प्रचार पर निर्णायक प्रहार किया गया। पाकिस्तान किसी ऐसे बयान की उम्मीद कर रहा था जिससे उसे उम्मीद की आखिरी किरण मिलती। लेकिन बैठक में इस बात की स्पष्ट रूप से पुष्टि की गई है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित किसी भी मुद्दे पर द्विपक्षीय ढंग से चर्चा की जानी है।’’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा, ‘‘हम व्यापार के बारे में बात कर रहे हैं, हम सैन्य और कई दूसरी चीजों पर बात कर रहे हैं। हमारे बीच कुछ शानदार चर्चा हुई, हम रात्रिभोज के लिये बीती रात साथ में थे और मैंने भारत के बारे में काफी जाना।’’

मोदी ने हाल के चुनाव में उनकी जीत पर ट्रंप द्वारा उन्हें बधाई दिए जाने के लिए उनका शुक्रिया भी अदा किया और कहा कि दोनों देशों के ‘‘साझा लोकतांत्रिक मूल्य’’ हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की बातचीत के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच 40 मिनट तक ‘‘बेहद उत्साहवर्धक, बेहद सकारात्मक बैठक’’ हुई।

इस साल मई में प्रधानमंत्री मोदी के दोबारा चुने जाने के बाद यह दोनों नेताओं के बीच तीसरी बातचीत थी। बातचीत के दौरान कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के बारे में पूछे जाने पर विदेश सचिव ने कहा कि द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान इस पर ‘‘कोई चर्चा’’ नहीं हुई।

एक अन्य सवाल पर गोखले ने कहा कि भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम नहीं उठाया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर में स्थिति सामान्य हो रही है।’’ विदेश सचिव ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिये राज्य में कुछ पाबंदियां जारी रहेंगी। गोखले ने कहा, ‘‘उनकी बैठक सैद्धांतिक रूप से व्यापार और ऊर्जा पर केंद्रित थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने अमेरिका से ऊर्जा आयात के महत्व पर बात की और इस संदर्भ का हवाला दिया कि चार अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के आयात पहले ही लंबित हैं और इसमें तेजी आने की उम्मीद है।’’

अमेरिका में अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के लिए अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री के ह्यूस्टन में अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों के शीर्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ वार्ता करने की उम्मीद है।

गोखले ने कहा कि इस मुलाकात का दोहरा उद्देश्य होगा। पहला यह देखने का कि हम अमेरिका से किस तरह और ऊर्जा का आयात कर सकते हैं। दूसरा उद्देश्य यह देखने का होगा कि हम अमेरिका में ऊर्जा क्षेत्र में किस तरह निवेश कर सकते हैं।

उधर, व्हाइट हाउस ने एक आधिकारिक वक्तव्य जारी कर कहा कि दोनों नेताओं ने अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक भागीदारी और व्यापार को विस्तारित करने के तौर-तरीकों पर चर्चा की।

इसमें कहा गया, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप ने तनाव कम करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता की आवश्यकता की बात दोहराई और अफगानिस्तान में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में भारत की भूमिका को मान्यता प्रदान की।’’

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