चैत्र नवरात्रि का आज पहला दिन शैलपुत्री माता की होगी पूजा, कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त…

रायपुर / चैत्र नवरात्रि आज से शुरू हो गई है। हर दिन अलग-अलग देवी के रुप की पूजा करते समय विशेष रंग का प्रयोग किया जाता है। चैत्र नवरात्र का आरम्भ होने से प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है। पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। शैलपुत्री मतलब पहाड़, पत्थर मतलब स्थिरता और पवित्रता। जीवन में स्थिरता तभी आती है, जब वह संपूर्ण होता है यानी स्वस्थ, सुखी और खशुहाल. चैत्र नवरात्र को वसंत या वासंतिक नवरात्रि भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि 8 दिनों की होगी, इस दौरान मां के नौ रूपों की पूजा होगी। जिनमें मां शैलपुत्री की पूजा सबसे पहले दिन होगी। बता दें चैत्र नवरात्रि से हिंदू नववर्ष का आरंभ भी माना जाता है।

नवरात्रि में हर दिन के लिए एक विशेष रंग होता है। माता की पूजा, प्रसाद और श्रृंगार के समय उस खास रंग का ध्यान रखा जाता है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की आराधना का दिन होता है। मां शैलपुत्री का पसंदीदा रंग लाल है, जो कि उल्लास, साहस और शक्ति का रंग माना जाता है। दूसरा दिन, मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के लिए विशेष दिन होता है। मां ब्रह्मचारिणी, कुंडलिनी जागरण के लिए शक्ति प्रदान करती हैं। वहीं तीसरा दिन देवि चंद्रघंटा का होता है। नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप का होता है। पांचवा दिन मां स्कंदमाता की आराधना के लिए समर्पित है। छठे दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की आराधना की जाती है। ऋषि कात्यायन की पुत्री मां कात्यायनी को सफेद रंग प्रिय है। सप्तमी तिथि को मां कलरात्रि की आराधना की जाती है। अष्टमी तिथि, महागौरी का समर्पित है। महागौरी देवी भक्तों में प्रसन्नता का संचार करती हैं और नौंवे दिन, मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन होता है।

कलश स्थापना – नवरात्र के पहले दिन घर की सफाई करें और जिस जगह पर माता की प्रतिमा स्थापित करना है वहां की सफाई कर चौकी स्थापित करें. इसके बाद मां दुर्गा के नाम की ज्योत जलाएं. एक कलश लें और उसमें मिट्टी डालें, फिर इसमें जौ के बीज छिड़क दें. एक अलग कलश लें और उस पर मौली बाधें और उस पर स्वास्तिक बनाएं. लोटे के ऊपर आमृपत्र रखें और उसमें एक नारियल रखकर चुनरी लपेट दें. अब कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के बीचों-बीच रख दें और इसी के सामने ज्योत स्थापित कर दें.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त – 6 अप्रैल की सुबह 06:19 से 10:26 बजे तक

पूजन विधि- सबसे पहले चौकी पर माता शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद गंगा जल से शुद्धिकरण करें. माता की चौकी स्थापित करें और उसी चौकी पर माता की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां शैलपुत्री सहित समस्त स्थापित देवताओं की पूजा करें. माता का आह्वान करें और माता को वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, फल, पान, अर्पित करें. इसके बाद आरती कर पूजन संपन्न करें.

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