रमजान मुबारक! दिखा चांद, रोजा कल से, जानिए इफ्तार और सहरी का समय

कोरोना के कहर के बीच इस बार का रमजान मनाया जाना है. इस पर्व को 30 दिनों तक मनाया जाता है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवें महीने को रमजान मनाने की परंपरा है. इस्लाम धर्म में इस पर्व को काफी पाक माना गया है. केरल स्थित कोझिकोड के कप्पड में चांद नजर आ गया है. कल से रमजान का महीना शुरु होगा, जो 24-25 मई तक चलेगा. कुछ देर पहले तक इस बात को लेकर संशय बना हुआ था कि चांद 23 को दिखेगा या 24 को, पर अब ये साफ हो गया है कि कल से रोजा शुरू हो रहा है. ऐसे में आप यहां से जुड़ कर जान सकते हैं रमजान के शुरू होने का सही समय और तारीक..

15 घंटे नौ मिनट का होगा पहला रोजा –

तेज झुलसती गर्मी में रोजेदार रोजा रखने वाले हैं. आपको बता दें की इस बार रोजे 15 घंटे से ज्यादा वक्त के होने वाले हैं. कल यानी पहला रोजा 15 घंटे नौ मिनट का होगा और अंतिम रोजा 15 घंटे एक मिनट अवधि का होगा. पहला रोजा सुबह 04.22 बजे शुरू होगा जो शाम को 6.53 बजे खत्म होगा।

केरल में दिखा चांद, रोजा कल से –
केरल स्थित कोझिकोड के कप्पड में चांद नजर आ गया है. कल से रमजान का महीना शुरु हो गया है, जो 24-25 मई तक चलेगा. कल के सेहरी का समय सुबह 4 बजकर 22 मिनट का है तो वहीं इफ्तार का वक्त शाम के 6 बजकर 53 मिनट है.

जाने रमजान का इतिहास –

मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए रमजान का महीना इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस महीने की गई इबादत का सवाब बाकी महीनों के मुकाबले 70 गुना मिलता है. रमजान में रोजा नमाज के साथ कुरान पढ़ने की भी काफी फजीलत है, क्योंकि रमजान के महीने में 21वें रोजे को ही पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब पर ही अल्लाह ने ‘कुरान शरीफ’ नाजिल किया गया था।

रमजान में खजूर की खासियत
रोजा इफ्तार में खजूर का इस्तेमाल क्यों करना चाहिए ये भी जान लेना चाहिए. तरीका ये है कि रूतब यानि पके हुए ताज़ा खजूर से रोज़ा इफ्तार किया जाए. अगर पके खजूर ने मिले तो सूखे खजूर यानि छोहारे से रोजा इफ्तार किया जाय. अगर वह भी न हो तो पानी से इफ्तार करना चाहिए।

रमजान पर इन बातों का रखे ध्‍यान –

  1. इंसान रमजान की हर रात उससे अगले दिन के रोजे की नियत कर सकता है. बेहतर यही है कि रमजान के महीने की पहली रात को ही पूरे महीने के रोजे की नियत कर लें.
  2. अगर कोई रमजान के महीने में जानबूझ कर रमजान के रोजे के अलावा किसी और रोजे की नियत करे तो वो रोजा कुबूल नहीं होगा और ना ही वो रमजान के रोजे में शुमार होगा.
  3. बेहतर है कि आप रमजान का महीना शुय होने से पहले ही पूरे महीने की जरूरत का सामान खरीद लें, ताकि आपको रोजे की हालत में बाहर ना भटकना पड़े और आप ज्‍यादा से ज्‍यादा वक्‍त इबादत में बिता सकें.
  4. रमजान के महीने में इफ्तार के बाद ज्‍यादा से ज्‍यादा पानी पीयें. दिनभर के रोजे के बाद शरीर में पानी की काफी कमी हो जाती है. मर्दों को कम से 2.5 लीटर और औरतों को कम से कम 2 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए.
  5. इफ्तार की शुरुआत हल्‍के खाने से करें. खजूर से इफ्तार करना बेहतर माना गया है. इफ्तार में पानी, सलाद, फल, जूस और सूप ज्‍यादा खाएं और पीएं. इससे शरीर में पानी की कमी पूरी होगी.
  6. सहरी में ज्‍यादा तला, मसालेदार, मीठा खाना न खाएं, क्‍यूंकि ऐसे खाने से प्‍यास ज्‍यादा लगती है. सहरी में ओटमील, दूध, ब्रेड और फल सेहत के लिए बेहतर होता है.
  7. रमजान के महीने में ज्‍यादा से ज्‍यादा इबादत करें, अल्‍लाह को राजी करना चाहिए क्‍यूंकि इस महीने में कर नेक काम का सवाब बढ़ा दिया जाता है.
  8. रमजान में ज्‍यादा से ज्‍यादा कुरान की तिलावत, नमाज की पाबंदी, जकात, सदाक और अल्‍लाह का जिक्र करके इबादत करें. रोजेदारों को इफ्तार कराना बहुत ही सवाब का काम माना गया है.
  9. अगर कोई शख्‍स सहरी के वक्‍त रोजे की नियत करे और सो जाए, फिर नींद मगरिब के बाद खुले तो उसका रोजा माना जाएगा, ये रोजा सही है.
  10. रमजान के महीने को तीन अशरों में बांटा गया है. पहले 10 दिन को पहला अशरा कहते हैं जो रहमत का है. दूसरा अशरा अगले 10 दिन को कहते हैं जो मगफिरत का है और तीसरा अशरा आखिरी 10 दिन को कहा जाता है जो कि जहन्‍नम से आजाती का है.
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