VIDEO – बाघों का गढ़ बांधवगढ़, एडवेंचर और फन का खजाना है बांधवगढ़…..

बांधवगढ राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित है। यह वर्ष 1968 में राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया था। इसका क्षेत्रफल 437 वर्ग किमी है। यहां Babh आसानी से देखा जा सकता है। यह मध्यप्रदेश का एक ऐसा राष्ट्रीय उद्यान है जो 32 पहाड़ियों से घिरा है। 

यह भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान हैं। बाघों का गढ़ (बांधवगढ़?) 448 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। इस उद्यान में एक मुख्य पहाड़ है जो ‘बांधवगढ़‘ कहलाता है। 811 मीटर ऊँचे इस पहाड़ के पास छोटी-छोटी पहाड़ियाँ हैं। पार्क में साल और बंबू के वृक्ष प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं। बाँधवगढ़ से सबसे नजदीक विमानतल जबलपुर में है जो 164 किलोमीटर की दूरी पर है। रेल मार्ग से भी बाँधवगढ़ जबलपुर, कटनी और सतना से जुड़ा है। खजुराहो से बाँधवगढ़ के बीच 237 किलोमीटर की दूरी है। दोनों स्थानों के बीच केन नदी के कुछ हिस्सों को क्रोकोडाइल रिजर्व घोषित किया गया है।

इस क्षेत्र में पहला बाघ महाराज मार्तंड सिंह ने 1951 में पकड़ा था. मोहन नाम के इस सफेद बाघ को अब महाराजा ऑफ रीवा के महल में सजाया गया है. राष्ट्रीय उद्यान बनाए जाने से पहले बांधवगढ़ के आसपास के जंगल को महाराजाओं और उनके मेहमानों के शिकारगाह के रूप में कायम रखा गया था. यहीं की एक बाघिन सीता के नाम सबसे ज्यादा बार फोटो खींची जाने वाली बाधिन का रिकार्ड भी है. जबकि चार्जर नाम का एक नर को टूरिस्ट गाड़ियों को समीप जाकर हरकतें करने की वजह से 1990 के दौर में बहुत प्रसिद्धि मिली. सीता को शिकारियों ने मार डाला जबकि चार्जर बूढ़ा होकर 2000 में मरा. उसके शव को जहां दफनाया गया उस जगह को आज चार्जर प्वाइंट के नाम से जाना जाता है.

माना जाता है कि आज इस अभयारण्य में जितने भी बाघ मौजूद हैं वो चार्जर और सीता के ही वंशज हैं. इनके ही बच्चे मोहिनी, लंगरु और बिट्टू भी टूरिस्ट गाड़ियों के पास जाने के शौकीन थे. बाद में इन्हीं में से एक गाड़ी से मिले जख्म की वजह से मोहिनी की मौत हो गई. चार्जर के बाद बिट्टू का इस अभयारण्य पर राज था और वो इस अभयारण्य ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का सबसे ताकतवार बाघ बना. बिट्टू की मौत 2011 में हो गई. आज उसी का बेटा बामेड़ा इस अभयारण्य का सबसे ताकतवर नर है. बांधवगढ़ अभयारण्य खजुराहो से लगभग 237 किलोमीटर और जबलपुर से 195 किलोमीटर की दूरी पर है. पहले बांधवगढ़ के चारों ओर फैले जंगल का रखरखाव रीवा के महाराजा के शिकारगाह के रूप में किया जाता था. यहां बाघ के अलावा कई स्तनधारी जीव भी पाये जाते हैं. चीतल, सांभर, हिरण, जंगली कुत्ते, तेंदुएं, भेड़िए, सियार, लोथ बियर, जंगली सुअर, लंगूर और बंदर यहां बड़ी ही आसानी से देखे जा सकते हैं. सरीसृपों में किंग कोबरा, क्रेट, वाइपर जैसे सांपों की यहां भरमार है. यहां पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियां पायी जाती हैं. इनमें तोता, मोर, बगुला, कौआ, हॉर्नबिल, बटेर, उल्लू आदि शामिल हैं.

आप यहां जब भी जाएंगे आपको स्तनधारी जीव, सरीसृप और विभिन्न पक्षी बड़ी ही आसानी से दिख जाएंगे क्योंकि यहां पानी और आहार प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं.

बांधवगढ़ नेशनल पार्क में आप वाइल्डलाइफ को एक्सप्लोर करने के साथ एडवेंचर और फन के लिए जीप सफारी का इस्तमाल कर सकते है अगर आप यहां आ रहे हैं तो पहले से ही इसकी बुकिंग करा लें। साथ ही अपने साथ एक पहचान पत्र जरूर रखें। इसके साथ ही बांधवगढ़ मार्केट में आप शापिंग का लुफ्त भी उठा सकते है छोटे-छोटे स्टॉल्स में खाने-पीने से लेकर पहनने-ओढ़ने तक का हर एक सामान मौजूद रहता है यहाँ  बांधवगढ़ की खूबसूरत तस्वीरों और किताबों को भी इस मार्केट में आसानी से खरीदा जा सकता है।

  
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