PM मुद्रा योजना बेराजगारी दूर करने में विफल, 45 साल के सर्वोच्च स्तर पर बेरोजगारी, नौजवानों से धोखाधड़ी की गुनाहगार मोदी सरकार – धनंजय सिंह

00 मुद्रा योजना बेरोजगारों को कर्जदार बना दिया, लेकिन रोजगार देने में असफल

रायपुर / प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में राज्य के बेरोजगारों को लाभ नहीं मिलने का आरोप कांग्रेस ने लगाया प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर कहा कि मोदी भाजपा की सरकार नौजवानों से धोखाधड़ी की गुनगाहगार है एनएसएसओ की रिपोर्ट मुद्रा योजना की विफलता बता रही है। देश में बेरोजगारी के आंकड़े 45 साल के सर्वोच्च स्तर पर 6.1 फीसदी तक पहुंच गया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना रोजगार देने में असफल साबित हुआ है।

मुद्रा योजना के तहत बैंको ने बेरोजगारों को उनके मांग के अनुसार ऋण सहायता नहीं दी बल्कि खानापूर्ति के लिये बैंको ने अपने से सहुलियत के हिसाब से आवेदनकर्ताओं को ऋण मुहैया कराई जिसके कारण बेरोजगार कर्जदार तो हो गये पर रोजगार शुरू नहीं कर पाये। मोदी भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान मुद्रा योजना के माध्यम से 30 करोड़ को लाभ मिलने का दावा कर जनता को भरमाने का काम किया था जो हवा हवाई निकली। मुद्रा योजना के तहत देश भर में 7.3 लाख करोड़ रूपये की 15.56 करोड़ को लोन दिया गया। छत्तीसगढ़ के 46 प्रतिशत बेरोजगारों के आवेदन बैंको ने निरस्त कर दिया और जिनकी आवेदन स्वीकृत हुई भी है। उन हितग्रहियों को मांग के अनुसार ऋण नही दिया गया। मुद्रा योजना में दी गई राशि औसतन प्रत्येक हितग्रहियों को 23 हजार मिल रहा है। 23 हजार रुपये में पकोडे़ का स्टाल लगाना भी संभव नही है।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार की पहली कार्यकाल में जितनी भी योजना बनी वो कागजो और विज्ञापन तक सीमित रही है। आयुष्मान योजना, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान योजना, मुद्रा योजना, सहित कई ऐसे योजना है जो सुनने में कर्णप्रिय लगते है, पर धरातल में फेल साबित हो रही है। मुद्रा योजना के आवेदनों पर बैंकों के द्वारा विचार नहीं किया जा रहा है बल्कि युवाओं के आवेदन को सीधा निरस्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में मुद्रा योजना के सफलता के गुणगान कर बेरोजगारों को भरमाने वाली भाजपा अब मौन क्यों हैं ? मुद्रा योजना के नाम से युवाओं के साथ धोखा हो रहा है। मुद्रा योजना के माध्यम से 75 फीसदी महिलाओं को कर्ज दिया गया 50 फीसदी अनुसुचित जाति, अनुसुचति जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग को दिया गया। लेकिन आवेदनकर्ता को उनके मांग के अनुसार ऋण राशि देने के बजाय बैंक सिर्फ खानापूर्ति करने के लिए ऋण दिये जिसके कारण जो बेरोजगार थे। अब कर्जदार हो गये। लेकिन अपना रोजगार शुरू नहीं कर पाये।

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