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न्यायालयों के प्रति लोगों की आस्था कम नहीं होना चाहिए: न्यायमूर्ति श्री त्रिपाठी 

00 मुख्य न्यायाधीश ने कहा बस्तर मेरे दिल के उतने ही करीब, जितना बिलासपुर और रायपुर

00 उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने किया नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ

जगदलपुर / छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक न्यायमूर्ति अजय कुमार त्रिपाठी ने कहा कि जब मंदिर और न्याय के मंदिर में लोगों की भीड़ बढ़ जाए, तो यह माना जाता है कि उन्हें कहीं ना कहीं तकलीफ जरूर है। वे आस्था के कारण वहां जाते हैं। न्याय के मंदिर में लोगों की आस्था को कभी डिगने ना दें। यह सभी न्यायायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है। मुख्य न्यायाधीश श्री त्रिपाठी आज शनिवार को जगदलपुर के जिला न्यायालय परिसर में ’नेशनल लोक अदालत ’ का शुभारंभ करने के बाद आयोजित समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं बस्तर जिले के पोर्टफोलियो न्यायाधीश शरद कुमार गुप्ता इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित थे।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर दक्षिण में स्थित बस्तर का यह न्याय का मंदिर भी उनके दिल के उतने ही करीब है, जितना बिलासपुर का उच्च न्यायालय। उन्होंने कहा कि लोगों को शीघ्र से शीघ्र न्याय दिलाने के लिए न्यायालयों में सुनवाई समय पर प्रारंभ हो।  सभी न्यायायिक अधिकारी और अधिवक्ता पक्षकारों  को न्याय दिलाने का कार्य पूरी संवेदनशीलता से करें। उन्होंने जगदलपुर में दस वर्ष से अधिक पुराने प्रकरण लंबित नहीं होने पर बधाई देते हुए कहा कि न्यायालयीन कार्य समय पर प्रारंभ होता है तो और अच्छे परिणाम आएंगे।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नेशनल लोक अदालत एक पर्व का रूप ले रहा है। प्रतिवर्ष तीन से चार नेशनल लोक अदालत आयोजित होते हैं। उन्होंने कहा कि नेशनल लोक अदालतों के प्रति अधिवक्ताओं में भ्रांति है। बहुत से अधिवक्ता यह मानते हैं कि लोक अदालत में सुलह-समझौतों से प्रकरणों का निराकरण हो जाने से उनकी रोजी-रोटी पर असर पडे़गा। उन्होंने कहा स्पष्ट किया  कि लोक अदालत के  माध्यम से छोटे विवाद या सेवाओं से संबंधित मामलों का निराकरण होता है, जिसके लिए पक्षकार परेशान होते हैं। गंभीर प्रकृति के प्रकरणों का निराकरण नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखना चाहिए कि न्याय प्राप्त करने के लिए कोई पक्षकार पीड़ित ना बन जाए। न्यायमूर्ति श्री त्रिपाठी ने रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति श्री सीकरी के एक कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायायिक अधिकारी एवं अधिवक्ताओं में नारीत्व का भाव होना चाहिए, क्योंकि नारी में मम्तत्व का भाव होता है। यह भाव न्यायायिक अधिकारी और अधिवक्ताओं को पक्षकारों को न्याय दिलाने महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने अधिवक्ताओं का आव्हान किया कि इस पेशे को आय का जरिया ना बनाएं। ऐसा करने के लोगों की न्याय के प्रति आस्था कम होगी और वे दूसरे माध्यम से अपने प्रकरणों के निराकरण के लिए उन्मुख होंगे। आप एक पूंजीपति और एक गरीब पक्षकार से एक समान फीस नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि समाज में न्याय की एक निश्चित प्रक्रिया है तथा आपसी द्वंद्व से न्याय प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने बस्तरवासियों से कहा कि वे किसी भी प्रकार से स्वयं को कटा हुआ महसूस न करें, क्योंकि बस्तर भी मेरे दिल के उतने ही करीब है, जितना बिलासपुर का हाईकोर्ट और छत्तीसगढ़ के दूसरे न्यायालय उनके लिए महत्व रखते हैं।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और  बस्तर के पोर्टफोलियो न्यायाधीश न्यायमूर्ति शरद कुमार गुप्ता ने इस अवसर पर कहा  कि न्यायालयों में प्रकरणों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन प्रकरणों में एक पक्ष जीतता है और एक पक्ष हारता है। इन प्रकरणों की सुनवाई के दोैरान समय और पैसा लगता है, जिससे पक्षकार दुखी रहते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए पक्षकारों को  लोक अदालतों में आपसी सुलह और समझौते से प्रकरणों का निराकरण करने और न्यायालय  के माध्यम से इन पर मुहर लगवाना होता है। उन्होंने कहा कि इससे पक्षकारों के बीच समन्वय और सौहार्द्र बढ़ता है और सद्भावना में सही उपलब्धियां अपने आप आती हैं। उन्होंने कहा कि लोक अदालतें अभी चिंगारी के रुप में हैं और आने वाले समय में यह मसाल का रुप लेगी और समाज को न्याय का मार्ग दिखाएंगी। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि नेशनल लोक अदालतोें के माध्यम से प्रकरणों के शीघ्र निराकरण में अधिवक्ताओं द्वारा पूर्ण सहयोग दिया जाएगा।

जगदलपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद कुमार वर्मा ने इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन दिया और आभार प्रदर्शन मुख्य न्यायिक मस्जिट्रेट एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री अच्छे लाल काछी ने किया।

इस अवसर पर राज्य शासन के विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव रविशंकर शर्मा, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल नीलमचंद सांखला, कमिश्नर अमृत कुमार खलखो, पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा, मुख्य वन संरक्षक बीपी नोन्हारे, पुलिस अधीक्षक डी. श्रवण, अपर कलेक्टर जगदीश सोनकर, सहायक कलेक्टर चंद्रकात वर्मा, अपर कलेक्टर अरविंद एक्का सहित जिला प्रशासन, न्यायायिक अधिकारी तथा पुलिस प्रशासन के अधिकारीगण, अधिवक्ता, पैरालीगल वालिंटियर्स, विधि छात्र तथा पक्षकार उपस्थित थे।

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