Saturday, April 5, 2025
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मुख्यमंत्री के सामने रखी गई नाबार्ड की योजनाएं : आदिवासी इलाकों में ’बाड़ी विकास परियोजना’ का होगा और ज्यादा विस्तार: डॉ. रमन सिंह

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00 प्रदेश में 77 बाड़ी विकास परियोजनाओं में 54 हजार से ज्यादा आदिवासी किसान परिवारों को मिल रहा फायदा 

रायपुर / मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की अनेक प्रमुख योजनाएं पेश की गई। नाबार्ड के अधिकारियों ने कम्प्यूटर आधारित प्रस्तुतिकरण में मुख्यमंत्री को इन योजनाओं की जानकारी दी। 
डॉ. रमन सिंह ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए नाबार्ड की बाड़ी विकास परियोजनाओं का और भी ज्यादा विस्तार करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा जिले में आदिवासी किसानों के लिए चल रही इस परियोजना को अन्य जिलों में भी लागू किया जाना चाहिए। डॉ. सिंह ने अधिकारियों को क्षेत्र विशेष के लिए वहां की उद्यानिकी फसलों के हिसाब से विशेष परियोजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम के साथ-साथ कटहल, लीची, केला, पपीता, जिमिकंद जैसी फसलों के साथ मिर्च, प्याज, इमली, टमाटर की अंतरवर्ती फसल ली जा सकती है। डॉ. सिंह ने आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की योजनाओं पर प्रस्तुतिकरण के दौरान अधिकारियों को यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाड़ी विकास परियोजना  विस्तार मानपुर, मोहला, चौकी बालोद, बोडला सहित प्रदेश के अन्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में किया जा सकता है। किसानों की आमदनी दोगुनी करने में यह काफी मददगार साबित हो सकती है।
बैठक में नाबार्ड के अधिकारियों ने बताया कि आदिवासी किसानों को एक एकड़ में उद्यानिकी फसलों के पौधरोपण के लिए प्रति एकड़ 45 हजार रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। ऐसी बाड़ियां 5 से 7 वर्षो में विकसित हो पाती है। अधिकारियों ने बताया कि नाबार्ड द्वारा प्रदेश में बाड़ी विकास की 77 परियोजनाएं संचालित की जा रही है, जिनमें 54 हजार 716 आदिवासी परिवार शामिल है। बाड़ी विकास की इन योजनाओं के लिए नाबार्ड द्वारा लगभग 210 करोड़ रूपए अनुदान स्वीकृत किया गया है। जिसमें से 124 करोड़ रूपए का अनुदान किसान परिवारों को दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और नाबार्ड के सहयोग से बाड़ी विकास कार्यक्रम का और अधिक विस्तार किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक परिवार लाभान्वित हो सके। मुख्यमंत्री ने परम्परागत रूप से सब्जियों और उद्यानिकी फसलों की पैदावार करने वाले मरार समाज के हितग्राहियों को इस योजना से जोड़ने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव विवेक ढांड, ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव एन.बैजेन्द्र कुमार, कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एम.के. राउत, आदिम जाति विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एन.के. असवाल, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव अमिताभ जैन, वन विभाग के प्रमुख सचिव आर.पी. मण्डल, खनिज विभाग के सचिव सुबोध कुमार सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. एम. गीता और नाबार्ड के छत्तीसगढ़ क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. आर.एम. कुमुर सहित संबंधित अधिकारी प्रस्तुतिकरण के दौरान उपस्थित थे।

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