VIDEO – ख्वाजा साहब ने अपने आप को 6 दिन तक कमरे में क्यों रखा था बन्द…जानें – अजमेर शरीफ दरगाह के बारे में रोजक तथ्य

VIDEO – ख्वाजा साहब ने अपने आप को 6 दिन तक कमरे में क्यों रखा था बन्द…जानें – अजमेर शरीफ दरगाह के बारे में रोजक तथ्य

राजस्थान की अजमेर शरीफ दरगाह का नाम तो सभी ने सुना ही होगा, अजमेर शरीफ के नाम से प्रसिद्ध दरगाह में हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की मजार है। अजमेर शरीफ के नाम से प्रसिद्ध ये दरगाह वाकई देखने लायक है। यहां केवल मुस्लिम ही नही बल्कि दुनिया भर से हर धर्म के लोग खिंचे चले आते हैं। क्या आप जानते हैं ? -मोहम्मद बिन तुगलक हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी की दरगाह में आने वाला पहला व्यक्ति था जिसने 1332 में यहां की यात्रा की थी। -निजाम सिक्का नामक एक साधारण…

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VIDEO- रमजान मुबारक, रोजे रखने के लिए होते हैं ये खास नियम

VIDEO- रमजान मुबारक, रोजे रखने के लिए होते हैं ये खास नियम

इस्‍लाम धर्म में रमजान का महीना सबसे पवित्र माना जाता है। रमजान के महीने में मुस्लिम लोग रोजा रखते हुए अल्‍लाह की इबादत करते हैं। इस बार रमजान की शुरुआत 7 मई से हो रही है। रोजे रखने का मतलब सिर्फ भूखा रहना नहीं होता है, बल्कि यह खुदा ही नहीं खुद की भी इबादत है। रोजे रखने का अर्थ अपनी आदतों और अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण भी होता है।  रमजान के दौरान एक महीने तक रोजे रखे जाते हैं। इस दौरान, कई तरह की बुरी आदतों से भी दूर रहा…

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चैत्र नवरात्रि का आज पहला दिन शैलपुत्री माता की होगी पूजा, कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त…

चैत्र नवरात्रि का आज पहला दिन शैलपुत्री माता की होगी पूजा, कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त…

रायपुर / चैत्र नवरात्रि आज से शुरू हो गई है। हर दिन अलग-अलग देवी के रुप की पूजा करते समय विशेष रंग का प्रयोग किया जाता है। चैत्र नवरात्र का आरम्भ होने से प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है। पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। शैलपुत्री मतलब पहाड़, पत्थर मतलब स्थिरता और पवित्रता। जीवन में स्थिरता तभी आती है, जब वह संपूर्ण होता है यानी स्वस्थ, सुखी और खशुहाल. चैत्र नवरात्र को वसंत या वासंतिक नवरात्रि भी कहा जाता…

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VIDEO – आदि शक्ति माँ ज्वाला देवी मंदिर धूमा देवी के नाम से भी प्रसिद्द है, प्रतिदिन 5 बार होती है भव्य आरती ….

VIDEO – आदि शक्ति माँ ज्वाला देवी मंदिर धूमा देवी के नाम से भी प्रसिद्द है, प्रतिदिन 5 बार होती है भव्य आरती ….

आदि शक्ति माँ ज्वाला देवी के मंदिर की कई किवदंतियां प्रचलित हैं, यहाँ भक्तों के श्रद्धा भाव से सिर्फ एक नारियल मात्र चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, माँ ज्वाला देवी का यह शक्तिपीठ धूमा देवी के नाम से भी प्रसिद्द है, माँ ज्वाला देवी के मंदिर में शांति और सोंदर्य का अद्भूत अनुभव भक्तों को यहाँ बार -बार खींच लाता है।  माँ ज्वाला देवी का मंदिर माँ के सभी 51 शक्तिपीठों में से सबसे अधिक उंचाई पर स्थित है। शांति और सोंदर्य का अद्भूत अनुभव भक्तों को यहाँ बार -बार खींच लाता…

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खरमास खत्म, अब से शुरू हो जाएंगे शुभ कार्य, जानिए शुभ वैवाहिक मुहूर्त…

खरमास खत्म, अब से शुरू हो जाएंगे शुभ कार्य, जानिए शुभ वैवाहिक मुहूर्त…

शास्त्रों में शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का होना बड़ा महत्व है। वैवाहिक बंधन को सबसे पवित्र रिश्ता माना गया है। इसलिए इसमें शुभ मुहूर्त का होना जरूरी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना जरूरी है। विगत कई वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष मंगलकारी नक्षत्रों के राजा पुष्य का गुरु और रवि के साथ संयोग पिछले वर्षों से अधिक बन रहा है, I इस वर्ष 12 महीनों में पांच दिन रवि और 3 दिन गुरु पुष्य नक्षत्र का…

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VIDEO – कुतुबमीनार ! भारत में मुस्लिम शासक द्वारा अपने लिए बनवाया गया यह पहला मकबरा है…

VIDEO – कुतुबमीनार ! भारत में मुस्लिम शासक द्वारा अपने लिए बनवाया गया यह पहला मकबरा है…

क्या आप जानते है … कुतुबमीनार का निर्माण गुलाम वंश के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1193 ई० में शुरू कराया था। लेकिन कुतुबुद्दीन ऐबक के दामाद एवं उत्‍तराधिकारी शमशुद्दीन इल्तुतमिश ने इसका निर्माण कार्य पूरा कराया और कुतुब मीनार का नाम ख़्वाजा क़ुतबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया था।  कुतुब मीनार की ऊँचाई 72.5 मीटर है, इसका धरतलीय व्यास 14.32 मीटर और शीर्ष बिन्दु का व्यास 2.75 मीटर है। कुतुब मीनार 1326 ई. में क्षतिग्रस्त हो गई थी और मुगल बादशाह मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने इसकी मरम्मत करवायी…

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भारत के 10 प्रसिद्ध गुरूद्वारे जहाँ सिक्खों के भक्ति अटल है…

भारत के 10 प्रसिद्ध गुरूद्वारे जहाँ सिक्खों के भक्ति अटल है…

गुरुद्वारा (पंजाबी: ਗੁਰਦੁਆਰਾ), जिसका शाब्दिक अर्थ गुरु का द्वार है सिक्खों के भक्ति स्थल हैं जहाँ वे अपने धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं। गुरुद्वारों में हर प्रकार के व्यक्ति आ सकते हैं, चाहे वे किसी भी धर्म को मानते हों (या ना भी मानते हों)। तथापि, आगन्तुकों के लिये यह आवश्यक है कि वे प्रवेश करने से पूर्व जूते-चप्पल इत्यादि उतार दें, हाथ धोएं तथा सिर को रूमाल आदि से ढक लें। शराब, सिगरेट अथवा अन्य नशीले पदार्थ भीतर ले जाना वर्जित है। बता दे की सिक्खों के 10 गुरु रहे है जिनके…

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64 योगिनियों की पूजा करने से नवरात्रि में मिलेगा सब कुछ और करें दुर्गा चालीसा का पाठ, दूर होंगे सारे दुख

64 योगिनियों की पूजा करने से नवरात्रि में मिलेगा सब कुछ और करें दुर्गा चालीसा का पाठ, दूर होंगे सारे दुख

ऐसी मान्यता है की चौसठ योगिनियों की पूजा करने से सभी देवियों की पूजा हो जाती है। इन योगिनियों में दशमहाविद्याओं के अलावा, अम्बिका, पार्वती, काली आदि शक्ति की सभी देवियों के स्वरूप समाए हुए हैं। ये सभी आदिशक्ति मां काली का अवतार है। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने ये अवतार लिए थे। यह भी माना जाता है कि ये सभी माता पर्वती की सखियां हैं। इन चौंसठ देवियों में से दस महाविद्याएं और सिद्ध विद्याओं की भी गणना की जाती है। ये सभी आद्या शक्ति…

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मां शैलपुत्री की आराधना से आज प्रारंभ होगा शक्ति का पर्व

मां शैलपुत्री की आराधना से आज प्रारंभ होगा शक्ति का पर्व

नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर दुर्गा देवी के नौ रूपों की पूजा-उपासना बहुत ही विधि विधान से की जाती है। इन रूपों के पीछे तात्विक अवधारणाओं का परिज्ञान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है। मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है…

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नवरात्रि घटस्थापना के समय इन 9 बातों का नवरात्रि पर रखें ध्यान, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल…

नवरात्रि घटस्थापना के समय इन 9 बातों का नवरात्रि पर रखें ध्यान, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल…

नवरात्रि की 9 देवियां हमारी परंपरा एवं आध्यात्मिक संस्कृति के साथ जुड़ी हुई हैं। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्रि के 9 दिनों में क्रमश: अलग-अलग पूजा की जाती है। आदिशक्ति मां नवदुर्गा की आराधना सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद 10वें दिन लंका विजय के लिए प्रस्‍थान किया और विजय प्राप्त की। तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। 1. देवी को लाल रंग के वस्त्र, रोली, लाल चंदन, सिंदूर,…

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