VIDEO – खुद मां रमदईया देवी चलकर आई थी यहाँ अब भक्तो के आस्था का मुख्य केन्द्र बना, जहाँ 09 पीढ़ियों से बैगा कराते आ रहे पुजा

VIDEO – खुद मां रमदईया देवी चलकर आई थी यहाँ अब भक्तो के आस्था का मुख्य केन्द्र बना, जहाँ 09 पीढ़ियों से बैगा कराते आ रहे पुजा

कोरिया / जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर ग्राम चेर में स्थित मां रमदईया मंदिर भक्तो के आस्था का प्रमुख केन्द्र बना हुआ है। देवी रमदईया माता के मंदिर की मान्यता है कि यहां जो कोई भी सच्चे मन से मां की पुजा उपसना करता है और माता के दरबार में माथा टेकता है तो उसकी हर मनोकमना पूरी होती है। यही वजह है की कोरिया जिला ही नही दूसरे जिले व प्रदेश से भी मां रमदईया धाम पर भक्त पहुचे है। आपको बता दे की घने वृक्षो से आच्छादित उची…

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कोरिया में है बाबा भोलनशाह की मजार जहाँ हिन्दू परिवार चढ़ाता है पहला चादर, 46 वर्षो से चल रहा है सालाना उर्स…

कोरिया में है बाबा भोलनशाह की मजार जहाँ हिन्दू परिवार चढ़ाता है पहला चादर, 46 वर्षो से चल रहा है सालाना उर्स…

कोरिया / हजरत बाबा भोलनशाह वली रहमतुल्लाहअले की मजार पर लगने वाले तीन दिवसीय उर्स का आज से आगाज होने जा रहा है। आपको बता दे की देश के कौने – कौने से हजारों लोग हर वर्ष चादर चढ़ने यहाँ आते है, ऐसा कहते है की बाबा भोलनशाह की मजार पर सच्चे मन से जाकर यदि कोई मन्नत मागता है तो वह जरूर ही पूरी होती है और शायद यही कारण है की सालाना लगने वाले उर्स का यह लगभग 46 वाँ वर्ष है और पिछले  46   वर्षो से लगातार यह मजार आपसी भाईचारे और…

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VIDEO – जोगी मठ – पुरातत्विक स्थल जहाँ भगवान जैन तीर्थांकर की 2 मूर्तियों का ये है इतिहास ?

VIDEO – जोगी मठ – पुरातत्विक स्थल जहाँ भगवान जैन तीर्थांकर की 2 मूर्तियों का ये है इतिहास ?

छत्तीसगढ़ का आदिवासी बाहुल्य कोरिया जिला प्राकृतिक सौंदर्य से अटा पड़ा है। एक ओर जहॉ घने वनों की हरियाली हर किसी के मन को मोह लेती है, वही दूसरी ओर जिले के अनेक पुरातात्विक स्थल कोरिया जिले की प्रमुख विशेषता है।  आज हम आपको एक ऐसे ही पुरातात्विक स्थल के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते है और वो है कोरिया का जोगी मठ जिसे जोगी बाबा मंदिर के नाम से भी पुकारा जाता है।    यु तो कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत में दर्जनों की संख्या में ऐसे पुरातात्विक स्थल…

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VIDEO – मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देता है राजस्थान का मुकुट …हवामहल

VIDEO – मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देता है राजस्थान का मुकुट …हवामहल

राजस्थान की हवा महल जो एक राजसी-महल है जिसे बाहर से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देती है, हवामहल पांच-मंजिला स्मारक है,  चूने, लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित यह महल सुबह-सुबह सूर्य की सुनहरी रोशनी में इसे दमकते हुए देखना एक अनूठा एहसास देता है,हवा महल की देख-रेख राजस्थान सरकार का पुरातात्विक विभाग करता है। तो आईए सैर करते है हवा महल की और करीब से देखते है हवा महल की खूबसूरती ………………..VIDEO…   हवा महल राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक राजसी-महल है। इसे सन 1798 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था और इसे किसी…

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VIDEO – 450 साल पुराने इतिहास से जुड़ा है नाता सती के धाम का, शिलाओं और उन पर उकेरी गई कलाकृतियां गोंड राजाओं छोड़ती है छाप …

VIDEO –  450 साल पुराने इतिहास से जुड़ा है नाता सती के धाम का, शिलाओं और उन पर उकेरी गई कलाकृतियां गोंड राजाओं छोड़ती है छाप …

कोरिया जिले के चिरमिरी बरतूंगा कालरी के पास लगभग साढ़े चार सौ साल पुराने सती मंदिर के अवशेष मौजूद है। पत्थरो में उकेरी गई कलाकृतियां इसे गोंड शासनकाल से जोड़ती है। लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ज्यादातर मुर्तिया व पत्थर खंड – खंड हो चुकी है। ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व होने के बावजूद प्रशासन एवं पुरातत्व विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। यह तो स्थानीय लोगो की आस्था है जिसके कारण कुछ वर्षो पहले ही यहाँ बाउंड्री वाल का निर्माण कराया गया है। जिसके कारण कुछ हद तक…

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VIDEO – बाघों का गढ़ बांधवगढ़, एडवेंचर और फन का खजाना है बांधवगढ़…..

VIDEO – बाघों का गढ़ बांधवगढ़, एडवेंचर और फन का खजाना है बांधवगढ़…..

बांधवगढ राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित है। यह वर्ष 1968 में राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया था। इसका क्षेत्रफल 437 वर्ग किमी है। यहां Babh आसानी से देखा जा सकता है। यह मध्यप्रदेश का एक ऐसा राष्ट्रीय उद्यान है जो 32 पहाड़ियों से घिरा है।  यह भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान हैं। बाघों का गढ़ (बांधवगढ़?) 448 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। इस उद्यान में एक मुख्य पहाड़ है जो ‘बांधवगढ़‘ कहलाता है। 811 मीटर ऊँचे इस पहाड़ के पास छोटी-छोटी पहाड़ियाँ हैं। पार्क में साल और बंबू के वृक्ष प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं। बाँधवगढ़ से…

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VIDEO – ख्वाजा साहब ने अपने आप को 6 दिन तक कमरे में क्यों रखा था बन्द…जानें – अजमेर शरीफ दरगाह के बारे में रोजक तथ्य

VIDEO – ख्वाजा साहब ने अपने आप को 6 दिन तक कमरे में क्यों रखा था बन्द…जानें – अजमेर शरीफ दरगाह के बारे में रोजक तथ्य

राजस्थान की अजमेर शरीफ दरगाह का नाम तो सभी ने सुना ही होगा, अजमेर शरीफ के नाम से प्रसिद्ध दरगाह में हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की मजार है। अजमेर शरीफ के नाम से प्रसिद्ध ये दरगाह वाकई देखने लायक है। यहां केवल मुस्लिम ही नही बल्कि दुनिया भर से हर धर्म के लोग खिंचे चले आते हैं। क्या आप जानते हैं ? -मोहम्मद बिन तुगलक हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी की दरगाह में आने वाला पहला व्यक्ति था जिसने 1332 में यहां की यात्रा की थी। -निजाम सिक्का नामक एक साधारण…

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VIDEO- रमजान मुबारक, रोजे रखने के लिए होते हैं ये खास नियम

VIDEO- रमजान मुबारक, रोजे रखने के लिए होते हैं ये खास नियम

इस्‍लाम धर्म में रमजान का महीना सबसे पवित्र माना जाता है। रमजान के महीने में मुस्लिम लोग रोजा रखते हुए अल्‍लाह की इबादत करते हैं। इस बार रमजान की शुरुआत 7 मई से हो रही है। रोजे रखने का मतलब सिर्फ भूखा रहना नहीं होता है, बल्कि यह खुदा ही नहीं खुद की भी इबादत है। रोजे रखने का अर्थ अपनी आदतों और अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण भी होता है।  रमजान के दौरान एक महीने तक रोजे रखे जाते हैं। इस दौरान, कई तरह की बुरी आदतों से भी दूर रहा…

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चैत्र नवरात्रि का आज पहला दिन शैलपुत्री माता की होगी पूजा, कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त…

चैत्र नवरात्रि का आज पहला दिन शैलपुत्री माता की होगी पूजा, कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त…

रायपुर / चैत्र नवरात्रि आज से शुरू हो गई है। हर दिन अलग-अलग देवी के रुप की पूजा करते समय विशेष रंग का प्रयोग किया जाता है। चैत्र नवरात्र का आरम्भ होने से प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है। पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है। शैलपुत्री मतलब पहाड़, पत्थर मतलब स्थिरता और पवित्रता। जीवन में स्थिरता तभी आती है, जब वह संपूर्ण होता है यानी स्वस्थ, सुखी और खशुहाल. चैत्र नवरात्र को वसंत या वासंतिक नवरात्रि भी कहा जाता…

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VIDEO – आदि शक्ति माँ ज्वाला देवी मंदिर धूमा देवी के नाम से भी प्रसिद्द है, प्रतिदिन 5 बार होती है भव्य आरती ….

VIDEO – आदि शक्ति माँ ज्वाला देवी मंदिर धूमा देवी के नाम से भी प्रसिद्द है, प्रतिदिन 5 बार होती है भव्य आरती ….

आदि शक्ति माँ ज्वाला देवी के मंदिर की कई किवदंतियां प्रचलित हैं, यहाँ भक्तों के श्रद्धा भाव से सिर्फ एक नारियल मात्र चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, माँ ज्वाला देवी का यह शक्तिपीठ धूमा देवी के नाम से भी प्रसिद्द है, माँ ज्वाला देवी के मंदिर में शांति और सोंदर्य का अद्भूत अनुभव भक्तों को यहाँ बार -बार खींच लाता है।  माँ ज्वाला देवी का मंदिर माँ के सभी 51 शक्तिपीठों में से सबसे अधिक उंचाई पर स्थित है। शांति और सोंदर्य का अद्भूत अनुभव भक्तों को यहाँ बार -बार खींच लाता…

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