VIDEO – कर्मा महोत्सव पर खुद को रोक नही पाये खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, गुलाब कमरो और विनय जायसवाल विधायक, मांदर की थाप पर खूब थिरके

कोरिया / छत्तीसगढ़ सरगुजा संभाग के कोरिया में करमा पर्व बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम को खास मनाने के लिए विशेष आयोजन भी किया गया। जिसमें सरगुजा संभाग के लगभग 20 कर्मा नृत्य टीमों ने हिस्सा लेकर अपने कर्मा नृत्य से उपस्थित हजारों दर्शकों का मन मोह लिया।

यहाँ तक कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुँचे प्रदेश के खाद्य-संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत व कार्यक्रम के अध्यक्ष राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त गुलाब कमरों, मनेन्द्रगढ़ विधायक विनय जायसवाल, पूर्व विधायक गुलाब सिंह भी अपने आप को रोक न सके और कर्मा नृत्य के टीमों के साथ मांदर ( ढ़ोल ) गले में फंसा कर कदम से कदम मिला कर खुब नाचा।

आपको बता दे कि पिछलें 11 वर्षो से लगातार सरगुजा संभाग के कोरिया जिला शिवपुर चरचा नगर पालिका के खेल मैदान में संभाग स्तरीय कर्मा त्योहार को मनाने का आयोजन होता है। जिसमें संभाग के लगभग 20 कर्मा नृत्य टीमें अपनी स्वेक्षा से गाने बजाने खुशियां मनाने यहाँ एकत्रित होते है। पुरी रातभर दुर – दुर से आए कर्मा नृत्य टीमें नाचते गाते है। इस अवसर पर आयोजकों द्वारा खास तैयारियां भी की जाती है और जिले सहित संभाग के हजारों लोग यहाँ कार्यक्रम देखने आते है।

बता दे कि कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम के पूजा स्थल पण्डाल के बीचों – बीच रखे करम डार से होती है। जहाँ करम डार का कलम लगाया जाता है और करमडार के चारों तरफ व्रतधारियों द्वारा लाये गये ज्वार को सजा कर गोल रखा जाता है। जिसके बाद स्थानीय बैगा द्वारा विधिवत पूजा पाठ करने के बाद बैगा के द्वारा सभी व्रत धारियों महिला, पुरूष, युवतियो व बच्चों को करम देवजी के बारे में जानकारियां दी जाती है।

इस त्यौहार को मनाने के पीछे मान्यता है कि इस पूजा से कर्म अच्छे होते है एवं उसके सभी काम पूरे होते है। जिसके कर्म अच्छे नहीं होते है वो अगर करमदेव की पूजा पूरी विधि विधान से करे तो उनका भी कर्म अच्छा हो जाता है। ग्रामीण अंचलों में इस त्यौहार में करमडार के पास रखे ज्वार के सामने करमा नृत्य करना ग्रामीणों की पंरमपरा है।

ज्ञात हो कि कर्मा के त्यौहार किसानों की फसल बोआई से यह प्रारंभ हो जाता है। ज्वार बुनने का यह रश्म एक सप्ताह पहले ही लगभग शुरू हो जाता है। सभी व्रत धारियों द्वारा ज्वार को ही सर पर रखकर करमडार के कलम पास चारों तरफ रखा जाता है। करमा के दिन सभी व्रत किये हुये महिला, पुरूष, बच्चे अगले दिन पूजा के काम में लाये हुये जो वस्तु व सामग्री विसर्जन करते है। उन्हे विसर्जन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण या पालन करते है।

चूँकि यह त्यौहार को देश के कुछ गिने – चुनें हिस्सों जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में ही मनाया जाता है। यह भी एक कारण है कि देश में कई लोग इस त्यौहार से अनभिज्ञ है।

आज के इस कर्मा महोत्सव की बात करे तो इस कार्यक्रम में सरगुजा संभाग के लगभग 20 कर्मा नृत्य टीमों ने हिस्सा लेकर अपने कर्मा नृत्य से उपस्थित हजारों दर्शकों का मन मोहा।

इस अवसर पर जब हमनें मंत्री अमरजीत भगत से उनकी राय लेनी चाही तो उन्होंने प्रदेश की जनता को कर्मा त्यौहार की ढेरों शुभकामनाएं दी और कहाँ की इस त्यौहार को बचाने हमारे संस्कृति को बचाने संवारने के का ये अच्छा प्रयास है।

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