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जोगी के फैसले पर टीकी निगाहे, राजनीती भूचाल या महज दिखावा

रिपोर्ट / द्रोणाचार्य दुबे / 07587306066
00 अंदरुनी तौर पर काग्रेसी विधायको के आने का भरोसा तो साख ना गिरने का डर भी है जोगी को

कोरिया / राजनीती भी क्या चीज है जो इससे दूर है वो आना नहीं चाहता है और जो राजनीती में है वो इसे छोड़ना नहीं चाहते है, जोगी का हालिया बयान और 06 जून को मरवाही से नई पार्टी की घोषणा इसी बात की ओर इशारा करती है। जोगी द्वारा नई पार्टी बनाने के फैसले ने छत्तीसगढ़ की राजनीती पर चौतरफा हमला किया है।राजनीती के धुरन्धर जोगी के फैसले से आहत है क्योकि इतिहास गवाह है क़ि जिस भी बड़े नेता ने बड़े दलो को छोड़कर स्वयं की पार्टी बनाई है वह गर्त में ही गया है। हा यह बात सिर्फ अप्रत्याशित केजरीवाल पर हो सकती है जो पार्टी बनाने के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी में काबिज हुए। लेकिन सच यह भी है की केजरीवाल किसी बड़े दल को नहीं छोड़ा था बल्कि पार्टी और राजनीती के कैरियर का शुरुआत शून्य और बड़े दलो के सरकार की नीति के विरोध से जन्म हुआ जो जोगी के नीति नियत और उद्देश्य सभी से अलग है। छत्तीसगढ़ की राजनीती में वे विधायक पशो पेश में है जो खुद को आदिवासी समुदाय का हमदर्द और प्रतिनिधित्व करने का दावा करते है आज लाचार और असहाय है। ऐसे विधायको के साथ अब सबसे बड़ी समस्या कांग्रेस छोड़ने का होगा। जोगी के असल समर्थक है इसी बात पर निर्भर करेगा की काग्रेस के दामन को त्याग कर जोगी साम्राज्य में कदम रखे लिहाज जोगी समर्थित विधायक कटघरे में है। बस्तर संभाग और सरगुजा संभाग के विधायको को जोगी आदिवासी समूह से जोड़कर राजनीती की चाल चलते आये है और यह फार्मूला कामयाब भी रहा पर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पंहुचा सका।

गीदड़ की मौत शहर की ओर भागने से –
गीदड़ की जब मौत आती है तो वह शहर की ओर भागता है कहावत अब जोगी के फैसले की ओर इशारा कर रहा है। अजीत जोगी के बयान और नई पार्टी की नीव रखने की घोषणा स्वयम्भू बनने की चाह का पैमाना है। बेटे की माया ने अजित जोगी जैसे कुशल राजनीतिज्ञ को इतना विवश कर सकता की कांग्रेस से तौबा करने की सार्वजनिक घोषणा हो वो भी जोगी के द्वारा अप्रत्याशित सा लगता है पर सच यही है। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के सभी एडिशनो में जोगी बखान छाया हुआ है अखबार समूहों को भी जैसे लगने लगा है की एक युग समाप्ति के कगार पर है वरना व्यवसायिक हो चुकी पत्रकारिता में बिना बिज्ञापन के दो दो पेज का कवरेज असहज है यह उस दृष्टि की सोच लगती है जो व्या पारिक प्रतिस्पर्धा के दौर में किसी छत्तीसगढ़ियां महापुरुष को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए अखबारो में जगह दी जा रही है। पतन और जन्म के भंवरजाल में फसे जोगी को उबरने के लिए एक निर्णय लेने की आवश्यकता थी जो उन्होंने किया पर समय और तारीख मेरी समझ से दोनों जोगी के पक्ष में नहीं है।

धुरन्धर का चुतियापा फैसला –
अजित प्रमोद कुमार जोगी एक नाम ही नहीं एक आदेश है एक लहर है । एक जूनून है यैसा जोगी मानते है और उन्होंने इस बात को प्रमाणित भी किया है। मुझे एक वाक्य राजधानी का याद आता है। युवा शक्ति की पहली पसंद रहे अजित जोगी के वे समर्थक जो उनसे सीधे सरोकार नहीं रखते थे पर कौतुहल बस कई बार अपने लक्ष्य को पाने के लिए जोगी के नाम का इस्तेमाल जरूर करते थे। उन्ही के बीच मेरा एक खास मित्र भी मौजूद था जो इस बात का गवाह है। राजधानी रायपुर में एक प्राइवेट कंपनी में किसी खास प्रयोजन के नाम से सहयोग लेने पहुचे युवा दल सीधे कंपनी प्रमुख के पास पंहुचा और बताया की फलां दिन फलां कार्यक्रम है जिसमे आपको फलां सहयोग करना है जोगी के हम सीधे संपर्क में है यह उन्ही का आदेश है। सच जानने के लिए कंपनी प्रमुख ने जोगी को फोन लगाकर पूछने की हिमाकत कर दी। नतीजा यह हुआ की युवा दल ने जितना सहयोग माँगा था उसका दोगुना देने के लिए जोगी जी ने कहा और हुआ भी यैसा पर आपको सच जानकर आश्चर्य होगा की उस युवा दल में एक भी युवा जोगी के सीधे संपर्क में नहीं था और ना ही किसी युवा में इतनी हिम्मत रही की कभी भी वे जोगी से आमने सामने बात किये हो और वो दिन था और आज का दिन है की जोगी के भक्ति की गाथा सुननी हो तो उन युवाओं से मिले। अंधी भक्ति की उपमा भी यदि आप दे तो गलत नहीं होगा यैसा होता है जोगी के काम करने और लोगों को जोड़ने का तरीका और अब वे ही यैसे फैसले ले जो एक साधारण सा व्यक्ति भी कह दे नहीं साहब आपका यह फैसला गलत है पर सच यह भी है की जोगी की सख्सियत इतनी बुलंद है की कोई भी उनके फैसले को डंडा नहीं दिखाने का साहस नहीं जुटा सकता है।

दोस्तों – साहब से अब लगने लगा है डर –
अजित जोगी को विश्वास है की कांग्रेस के आदिवासी बाहुल्य सहित कई विधायक उनके साथ है जो उनकी पार्टी को मजबूती प्रदान करेगे और आने वाले चुनाव में कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए रमण सरकार को पटखनी देगे और सत्ता तक पहुचेगे । जोगी समर्थित विधायको को इसी बात का डर है की यदि सिम्बल से बड़ा व्यक्तित्व है तो ठीक है लेकिन इतिहास गवाह है की व्यक्तित्व सिम्बल से बड़ा नहीं हो सकता लिहाजा जोगी का दामन थामना कैरियर को लात मारने जैसा है। समस्या यह है की साहब को सीधे विधायक मना कैसे करे। बीते सालों में नक्सलियों का हमला ताजा है । ये अलग बात है की दोषी कौन है अभी तक साबित नहीं हो सका है पर विधायक साहब के गुस्से से परिचित जरूर है।

छत्तीसगढ़ की बंदी काग्रेस अब होगी मुक्त –
जब से चर्चाये आम हुई है की मरवाही से अजित जोगी नई पार्टी का एलान करेगे और बेटे अमित का खुलकर साथ देगे छत्तीसगढ़ कांग्रेस काफी खुश है। जोगी के किसी भी बयान पर टिप्पड़ी करने से बच रहे है। हा इतना जरूर कहते है की आला कमान को सब पता है। प्रदेश कांग्रेस के नेता इस बात से भी खुश है की उनके फैसलों पर टांग अड़ाने वाले जोगी अब दो तरफ़ा की राजनीती नहीं कर पायेगे और रमन सरकार की बी टीम अजित जोगी के हटने से भाजपा पर असर पड़ेगा व कांग्रेस मजबूत होगी सरकार बनाएगी।

05 साल बढ़ी और रमन के गोठ –
छत्तीसगढ़ में रमन राज के और 05 साल पुख्ता हो गया है ऐसाा बीजेपी मान कर चल रही है। बीजेपी के गड़ितज्ञयो का सर्वे यह बता रहा है की कांग्रेस के जिताऊ विधायक जोगी समर्थक है और उनके अलग होने से कांग्रेस और कमजोर होगी और चुनाव के बाद का समीकरण सीधे तौर पर का कांग्रेस विरोधी जोगी सहयोगी के तर्ज पर चलेगा जो कांग्रेस के लिए नासूर होगा। सिम्बल और व्यक्तित्व की लड़ाई में बीजेपी को फायदा होगा और 05 साल बीजेपी सरकार के कार्यकाल में बढ़ोत्तरी होगी। उधर कांग्रेस यह सोच रही है की जो बीजेपी की बी टीम बनकर पहले से ही काम कर रही थी वो ज्यादा से ज्यादा स्वतंत्र होने पर 5 प्रतिशत और नुकसान कर पायेगा पर पार्टी के अंदरुनी जानकारियो से दूर रहकर कांग्रेस के लिए मनमाफिक गड्डा नहीं खोद सकते लिहाज कांग्रेस और ससक्त और मजबूत होगा।

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