इंदौर। दीपावली के दूसरे दिन यानी धोक पड़वा के अवसर पर इंदौर जिले के समीप स्थित गौतमपुरा में आज भी 200 साल पुरानी परंपरा निभाई गई। यहां हर साल की तरह इस बार भी हिंगोट युद्ध का आयोजन हुआ, जिसमें परंपरागत रूप से तुर्रा और कलंगी दलों के योद्धाओं ने एक-दूसरे पर अग्निबाण (हिंगोट) बरसाए। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस रोमांचक और खतरनाक युद्ध को देखने हजारों लोग उमड़ पड़े।
इस बार भी गौतमपुरा और रूणजी गांवों के योद्धा दो दलों में बंटे। दोनों पक्षों ने प्राचीन परंपरा के अनुसार बारूद भरे हिंगोटपाल में आग लगाकर एक-दूसरे पर फेंके। धधकते अग्निबाणों की यह वर्षा देखने में जितनी अद्भुत लगी, उतनी ही जोखिम भरी भी रही।
युद्ध के दौरान 35 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें 30 का मौके पर प्राथमिक उपचार किया गया। 5 लोगों को देपालपुर स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, जबकि 4 घायलों को महावीर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक व्यक्ति को फ्रैक्चर की चोट आई है, जबकि बाकी की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए थे। 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात रहे और दर्शकों को हिंगोट की चपेट में आने से बचाने के लिए 15 फीट ऊंचे बैरिकेड्स लगाए गए थे। पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी में यह आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में इसी युद्ध के दौरान एक 22 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी, जिसके बाद हिंगोट युद्ध को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में इसे खतरनाक परंपरा बताते हुए रोक की मांग की गई थी और इसकी तुलना तमिलनाडु के जल्लीकट्टू से की गई थी। मामला अब भी कोर्ट में लंबित है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का तर्क है कि हिंगोट युद्ध जानलेवा नहीं बल्कि साहस, परंपरा और लोक आस्था का प्रतीक है। उनका कहना है कि यह आयोजन पीढ़ियों से होता आ रहा है और अब इसे प्रशासन की निगरानी में सुरक्षा उपायों के साथ मनाया जाता है।
इस साल भी लोगों में परंपरा के प्रति उत्साह देखने को मिला। हिंगोट युद्ध देखने इंदौर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों दर्शक पहुंचे। परंपरा, श्रद्धा और जोखिम का यह अनोखा संगम एक बार फिर मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति की पहचान बन गया।
