सरकार को दिया संकेत, “जो हमें तवज्जो देगा उसी के साथ”
दंतेवाड़ा। बस्तर के माओवादी मोर्चे में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। MMC ज़ोन के नक्सलियों ने 1 जनवरी से हथियारबंद संघर्ष विराम (Ceasefire) की घोषणा करने का ऐलान किया है। MMC ज़ोन के प्रवक्ता अनंत के नाम से जारी प्रेस नोट में यह दावा किया गया है कि सभी नक्सली एक-एक कर नहीं बल्कि “एक साथ” संघर्ष विराम की ओर बढ़ेंगे।
प्रवक्ता ने नक्सल कैडर से अपील करते हुए कहा है कि वे व्यक्तिगत समर्पण न करें, बल्कि सामूहिक तौर पर एक साथ आगे आएं और “समर्पण” शब्द को स्वीकार करने के बजाय सरकार की ‘पूना मार्गेम अभियान’ की अवधारणा को मानने की दिशा में बढ़ें।
प्रेस नोट में पहली बार आपसी तालमेल और संपर्क के लिए ‘बाउपेंग’ का एक खुला फ्रीक्वेंसी नंबर भी जारी किया गया है, जिसे नक्सली ‘संघर्ष विराम के समन्वय’ के लिए प्रयोग कर सकेंगे।
अनंत ने खुलकर इशारा करते हुए कहा —
“जो सरकार हमें ज्यादा तवज्जो देगी, उसी सरकार के साथ जाएंगे।”
माओवादी प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि हथियार छोड़ने का मतलब जनता के खिलाफ “दग़ा” या “गद्दारी” नहीं है। उसके अनुसार —
“हथियार एक साध्य नहीं, साधन है… और वर्तमान हालात संघर्ष के लिए उचित नहीं हैं।”
जमीन पर क्या मायने?
बस्तर में सुरक्षा बलों के लगातार दबाव, बढ़ते सड़क निर्माण और जनसामान्य की बदलती सोच के बीच यह घोषणा बेहद अहम मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन अब इस प्रेस नोट की प्रामाणिकता, गणित और संभावित प्रभाव का विश्लेषण कर रहे हैं।
क्या 1 जनवरी से बस्तर के MMC ज़ोन में वाकई हथियारबंद संघर्ष विराम लागू होगा, या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीतिक चाल है?
सरकार एवं सुरक्षा एजेंसियों की अगली प्रतिक्रिया पर पूरे प्रदेश की नज़र रहेगी।
