उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन सिर्फ भगवान शिव की भक्ति का केंद्र नहीं, बल्कि वह ऐतिहासिक स्थल भी है जहाँ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल में शिक्षा ग्रहण की थी। मंगलनाथ रोड पर स्थित सांदीपनि आश्रम आज भी उस दिव्य शिक्षा परंपरा का जीवंत प्रमाण है, जिसे दुनिया गुरु–शिष्य संबंध के सर्वोच्च उदाहरण के रूप में याद करती है।
माना जाता है कि इसी गुरुकुल में श्रीकृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम और मित्र सुदामा ने महर्षि सांदीपनि के सानिध्य में 64 दिनों में 64 विद्याओं और 16 कलाओं का अध्ययन पूरा किया था। यही शिक्षा आगे चलकर श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व, धर्म स्थापना और न्याय व्यवस्था की नींव बनी।

सांदीपनि आश्रम के परिसर में स्थित गोमती कुंड श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। विश्वास किया जाता है कि गुरु सांदीपनि द्वारा आयोजित यज्ञ के लिए श्रीकृष्ण ने अपने दिव्य तेज से सभी पवित्र तीर्थों के जल को एक ही स्थान पर प्रकट किया था। अंकपात नामक स्थल भी आश्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहाँ श्रीकृष्ण के दिव्य प्रभाव से पृथ्वी पर विशेष चिह्न उत्पन्न हुआ था।
महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन में पर्यटन का दायरा तेजी से बढ़ा है और अब सांदीपनि आश्रम भी देश–विदेश के श्रद्धालुओं के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है। गुरुकुल की प्राचीन शैली, शांत और आध्यात्मिक वातावरण तथा श्रीकृष्ण की शिक्षा से जुड़ी कथाएँ देशभर से आगंतुकों को आकर्षित कर रही हैं। श्रद्धालु यहाँ पहुंचकर ऐसा अनुभव करते हैं मानो आज भी कृष्णकाल की स्मृतियाँ उसी रूप में जीवित हों।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महाकाल दर्शन के बाद सबसे अधिक संख्या सांदीपनि आश्रम पहुंचने वालों की होती है। यहां आने वाले आगंतुकों का मानना है कि यह स्थल केवल पर्यटन का हिस्सा नहीं, बल्कि भारतीय अध्यात्म, शिक्षा और संस्कृति की अनोखी विरासत है, जिसे संजोकर रखना हर भारतीय का दायित्व है।

सांदीपनि आश्रम आज आस्था, इतिहास और ज्ञान का एक अनुपम संगम बनकर खड़ा है। उज्जैन आने वालों के लिए यह स्थल दर्शन सूची में सबसे ऊपर रखा जा रहा है और यहाँ का आध्यात्मिक अनुभव हर आगंतुक के मन में अमिट प्रभाव छोड़ रहा है।


