बीजापुर।
नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में सुरक्षा बलों को एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है। बीजापुर जिले में पुलिस अधीक्षक एवं सीआरपीएफ के समक्ष कुल 52 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा और जनविरोधी विचारधारा का परित्याग किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों पर उनके पद और संगठनात्मक भूमिका के अनुसार कुल 1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पित माओवादियों में 21 महिला और 31 पुरुष कैडर शामिल हैं। ये सभी साउथ सब जोनल ब्यूरो, डीकेएसजेडसी, एओबी (आंध्र–ओडिशा बॉर्डर) डिवीजन तथा भामरागढ़ एरिया कमेटी से जुड़े हुए थे। यह आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत हुआ, जिसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
आत्मसमर्पण करने वालों में डीवीसीएम-01, कंपनी नंबर 07 के 02 सदस्य, पीपीसीएम-03, एसीएम-10, डिवीजन एवं ब्यूरो पार्टी सदस्य-08, प्लाटून एवं एरिया कमेटी पार्टी सदस्य-09, मिलिशिया प्लाटून कमांडर-03, डिप्टी कमांडर-01, मिलिशिया सदस्य-03, पीएलजीए सदस्य-01 तथा विभिन्न आरपीसी के सीएनएम/DAKMS/जनताना सरकार के 11 पदाधिकारी शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति के तहत सभी आत्मसमर्पित कैडरों को प्रत्येक को 50 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है, साथ ही उन्हें मुख्यधारा में पुनर्वास के लिए आगे की सुविधाएं भी दी जाएंगी।
गौरतलब है कि 1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 876 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं, वहीं 1126 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं और 223 माओवादी विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों, शासन की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के दबाव के चलते बड़ी संख्या में माओवादी अब हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास के मार्ग को अपना रहे हैं।
