रायपुर।
वंदे मातरम् गान की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के निर्देशानुसार शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में गुरुवार 15 जनवरी 2026 को गरिमामय एवं राष्ट्रप्रेरक सामूहिक वंदे मातरम् गान कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं अध्यक्ष महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तपेश चन्द्र गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सृजनात्मक चेतना और समर्पण का प्रतीक है। यह गीत हमें त्याग, सेवा और राष्ट्रहित में कर्म करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की शब्दावली शुद्ध हिन्दी एवं संस्कृत की सशक्त अभिव्यक्ति है, जो किसी धर्म या वर्ग विशेष से परे धरती माँ के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव प्रकट करती है।
कार्यक्रम का मंच संचालन इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वासुदेव साहसी ने किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् गीत क्रांतिकारियों के लिए ऊर्जा और संकल्प का स्रोत था। यह गीत देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना को जागृत करता था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की कविताई संवेदना को भी वंदे मातरम् के भाव से जोड़ते हुए इसे हर युग की प्रेरणा बताया।
वंदे मातरम् संदेश का वाचन बी.ए. तृतीय सेमेस्टर के छात्र अन्वित दीक्षित ने किया। सामूहिक वंदे मातरम् गान का नेतृत्व बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्रा सृष्टि अग्रवाल एवं उनके समूह द्वारा किया गया, जिससे पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के स्वर में गूंज उठा।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती निशा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में अतिथि व्याख्याता मोहन प्रताप सिंह का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ तथा एनएसएस के स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, त्याग और कर्तव्यबोध की भावना को सशक्त रूप से जागृत किया गया।
