56 भोग की परंपरा से जुड़ी है जन्माष्टमी, जानिए माखन-मिश्री से पंचामृत तक का महत्व
नई दिल्ली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर घर-घर में बाल गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए भक्त पूजा-पाठ के साथ तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाते हैं। धार्मिक परंपरा में छप्पन भोग का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए 56 तरह के व्यंजन तैयार करना संभव नहीं होता। ऐसे में कुछ प्रमुख भोग श्रद्धा के साथ भगवान को अर्पित किए जा सकते हैं।
माखन-मिश्री सबसे खास
बाल गोपाल की पूजा में माखन-मिश्री का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप और माखन प्रेम से जुड़ी कथाओं के कारण इसे उनका प्रिय भोग माना जाता है। जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री का भोग लगाना कई घरों की प्रमुख परंपरा है।
धनिया पंजीरी की खास परंपरा
जन्माष्टमी के व्रत के बाद प्रसाद के रूप में धनिया पंजीरी बनाने की परंपरा भी प्रचलित है। इसे धनिया पाउडर, मेवा और अन्य सामग्री से तैयार किया जाता है। कई स्थानों पर जन्माष्टमी के प्रसाद में इसका विशेष स्थान होता है।
पंचामृत से अभिषेक
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत का प्रयोग भगवान कृष्ण के अभिषेक और प्रसाद के रूप में किया जाता है। जन्माष्टमी की पूजा में पंचामृत को पवित्र प्रसाद माना जाता है।
पेड़ा या मखाना खीर का भोग
भगवान श्रीकृष्ण को दूध से बनी मिठाइयां अर्पित करने की परंपरा है। जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री पेड़ा, पेड़ा या मखाने की खीर का भोग लगाया जा सकता है। भक्त अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार इनमें से कोई भी प्रसाद तैयार कर सकते हैं।
भोग में तुलसी दल का महत्व
श्रीकृष्ण पूजा में तुलसी दल का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि भगवान विष्णु और उनके अवतार श्रीकृष्ण को तुलसी अत्यंत प्रिय है। इसलिए भोग अर्पित करते समय प्रसाद में तुलसी दल रखने की परंपरा है।
क्यों लगाया जाता है छप्पन भोग?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाए रखा था। इस दौरान उन्होंने भोजन नहीं किया। बारिश समाप्त होने के बाद ब्रजवासियों ने प्रेम और आभार के रूप में भगवान को सात दिन और आठ पहर के हिसाब से 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए। तभी से छप्पन भोग की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
छप्पन भोग में क्या-क्या होता है?
छप्पन भोग में अलग-अलग प्रकार के व्यंजन शामिल किए जाते हैं। इनमें कचौरी, पूरी, मठरी और अन्य नमकीन से लेकर पेड़ा, बर्फी, मालपुआ, जलेबी, हलवा, रसगुल्ला और घेवर जैसी मिठाइयां शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा दूध, लस्सी, मठ्ठा, रबड़ी, मौसमी फल और सूखे मेवे भी भोग का हिस्सा बनाए जाते हैं।
धार्मिक मान्यता का सार यही है कि भगवान श्रीकृष्ण को भोग में व्यंजनों की संख्या से ज्यादा श्रद्धा और भावना प्रिय है। इसलिए यदि 56 प्रकार के भोग संभव न हों तो माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और पंचामृत जैसे प्रसाद भी श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जा सकते हैं।
