रायपुर। हसदेव अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की अनदेखी करते हुए अडानी समूह के हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है। वहीं छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने कांग्रेस के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि फिलहाल तारा कोल ब्लॉक की केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है। खनन शुरू करने से पहले वन, पर्यावरण और अन्य सभी वैधानिक स्वीकृतियां लेना अनिवार्य होगा।
भूपेश बघेल ने पत्रकार वार्ता में कहा कि हसदेव अरण्य आदिवासियों के जीवन का आधार है और यह क्षेत्र हसदेव-बांगो बांध के लिए भी महत्वपूर्ण है। तारा कोल ब्लॉक में खनन शुरू होने पर बड़े पैमाने पर जंगल प्रभावित होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि करीब 5000 एकड़ में फैले इस ब्लॉक में 4000 एकड़ से अधिक घना जंगल है और उनके अनुसार 10 लाख से अधिक पेड़ों के कटने का खतरा है। उन्होंने लेमरू एलीफेंट रिजर्व और हाथियों के आवागमन के रास्तों पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई।
बघेल ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने वर्ष 2023 में तारा समेत नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था। वर्ष 2022 में विधानसभा ने भी हसदेव अरण्य में नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। कांग्रेस नेता का दावा है कि इसके बावजूद राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्र को पत्र लिखा।
उन्होंने नीलामी में सफल कंपनी को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि तारा कोल ब्लॉक ऐसी कंपनी को मिला है, जिसका संबंध अडानी समूह से है। बघेल ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार में छत्तीसगढ़ के जल, जंगल और जमीन को उद्योग समूहों के हवाले किया जा रहा है।
सरकार का पलटवार- नीलामी और खनन की अनुमति अलग-अलग
कांग्रेस के आरोपों के बीच छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने स्पष्ट किया है कि तारा कोल ब्लॉक की अभी केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है। नीलामी में कुल नौ बोलियां प्राप्त हुई थीं और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ब्लॉक CG Syn&Gas and Chemicals Limited को मिला है।
निगम के अनुसार सफल बोलीदाता को खनन शुरू करने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरण स्वीकृति, वन स्वीकृति सहित सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने से पहले न तो वास्तविक खनन शुरू किया जा सकता है और न ही वृक्षों की कटाई की अनुमति होगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि नीलामी में सफल होना अपने आप में खनन, वन या पर्यावरण स्वीकृति मिलने के बराबर नहीं है। सभी निर्धारित प्रक्रियाओं और वैज्ञानिक पर्यावरणीय आकलन के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
पुराने फैसलों पर भी आमने-सामने कांग्रेस-भाजपा
तारा ब्लॉक को लेकर दोनों पक्ष पुराने सरकारी फैसलों और पत्राचार को लेकर भी आमने-सामने हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि हसदेव अरण्य में कोयला संसाधनों के उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाएं लंबे समय से चली आ रही हैं। तारा कोल ब्लॉक वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित हुआ था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप अन्य ब्लॉकों के साथ निरस्त कर दिया गया।
सरकार ने यह भी याद दिलाया है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में कोयला ब्लॉकों के आवंटन को लेकर केंद्र से पत्राचार हुआ था। मोरगा कोल ब्लॉक के आवंटन को लेकर भी पूर्व सरकार द्वारा केंद्र से अनुरोध किए जाने का दावा किया गया है।
PSC को लेकर भी भूपेश ने सरकार को घेरा
पत्रकार वार्ता में भूपेश बघेल ने तारा कोल ब्लॉक के साथ छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2024 और 2025 की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने 2024 की मुख्य परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सही और गलत उत्तरों के मूल्यांकन में विसंगतियां सामने आई हैं।
2025 की परीक्षा में 265 पदों के मुकाबले मुख्य परीक्षा से तीन गुना यानी 795 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार तक पहुंचने की अपेक्षा थी, लेकिन 608 अभ्यर्थी ही साक्षात्कार के लिए पहुंचे। बघेल ने आयोग से पूछा कि 187 अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंक नहीं मिलने का आधार क्या है।
कांग्रेस ने मांग की है कि साक्षात्कार से पहले अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाएं, सभी अभ्यर्थियों की कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन हो और साक्षात्कार के लिए 1:3 का अनुपात सुनिश्चित किया जाए। पार्टी ने 2024 और 2025 की कथित अनियमितताओं की जांच की भी मांग की है।
एक तरफ जंगल, दूसरी तरफ ऊर्जा सुरक्षा का तर्क
तारा कोल ब्लॉक पर विवाद अब सिर्फ एक खदान की नीलामी तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे आदिवासी अधिकार, जंगल और पर्यावरण का सवाल बता रही है, जबकि सरकार देश की ऊर्जा जरूरत, विकास और घरेलू कोयला संसाधनों की उपलब्धता को महत्वपूर्ण बता रही है।
फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि तारा ब्लॉक की नीलामी हो चुकी है, लेकिन खनन शुरू नहीं हुआ है। आगे वन और पर्यावरण स्वीकृति समेत तमाम वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि परियोजना जमीन पर किस रूप में आगे बढ़ती है। यही प्रक्रिया अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा केंद्र बन गई है।
