Advertisement Carousel

नक्सल हिंसा पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर, 200 से अधिक सुरक्षा कैंप बनेंगे सेवा डेरा

अमित शाह बोले- नक्सलवाद के घावों पर मरहम लगाकर बस्तर को बनाना है खुशहाल, दंतेवाड़ा में 768 दिव्यांगों को मिलेंगे सहायक उपकरण

रायपुर/दंतेवाड़ा। नक्सलवाद से मुक्त बस्तर को अब विकास और समृद्धि की राह पर आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार पुनर्वास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दे रही हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब हिंसा से प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानपूर्ण जीवन उपलब्ध कराना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को खुशहाल बनाना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना सरकार का लक्ष्य है।

गुरुवार को दंतेवाड़ा में आयोजित दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर को अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। 15 से 17 अक्टूबर तक चलने वाले शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लाभार्थी शामिल हैं।

200 से अधिक सुरक्षा कैंप बनेंगे सेवा डेरा

अमित शाह ने बताया कि बस्तर में 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि जो स्थान पहले सुरक्षा व्यवस्था के केंद्र थे, वे अब जनसेवा और विकास के केंद्र बनेंगे।

आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास पर जोर

अमित शाह के अनुसार, लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। पुनर्वास के तहत 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 455 लोगों को नौकरी दी गई और 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए, जबकि 2,308 लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास जारी रहेंगे।

गांवों तक पहुंचेंगी बुनियादी सुविधाएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 431 स्कूल खोले गए हैं और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। सेवा डेरों में सिलाई-कढ़ाई, इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक तरीके से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियों के जरिए आजीविका के अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

सिंचाई और पशुपालन से बढ़ेगी आय

मुख्यमंत्री ने बताया कि इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं से करीब 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हो सके।

कृत्रिम अंग मिलने से दिव्यांगों को नई उम्मीद

शिविर में नक्सली हिंसा के कारण अंग गंवाने वाले लोगों को कृत्रिम पैर, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण दिए जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को पुनर्वास और सहायता से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। सरकार ने बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद अब रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के विस्तार के जरिए समग्र विकास को गति देने की प्रतिबद्धता जताई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!