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रायपुर-बिलासपुर स्मार्ट सिटी के वित्तीय प्रबंधन पर आरोप, RTI दस्तावेजों के आधार पर उठे सवाल

रायपुर। रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में वित्तीय प्रबंधन और निर्माण कार्यों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं शिकायतकर्ता मनोज सिंह ठाकुर ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से प्राप्त सूचना के अधिकार (RTI) के दस्तावेज जारी करते हुए आरोप लगाया है कि स्मार्ट सिटी के विकास कार्यों के लिए निर्धारित राशि का इस्तेमाल प्रशासनिक खर्चों में किया गया। उन्होंने मामले की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) से चल रही जांच में इन दस्तावेजों को शामिल कर कार्रवाई करने की मांग की है।

ठाकुर के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 को प्राप्त केंद्रीय मंत्रालय के RTI दस्तावेजों में रायपुर स्मार्ट सिटी के वित्तीय लेन-देन और अधूरे प्रोजेक्ट्स से संबंधित जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि, इन आरोपों और दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

विकास निधि से ₹1.82 करोड़ प्रशासनिक खर्च में लेने का दावा

शिकायतकर्ता के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रालय से प्राप्त दस्तावेज के पृष्ठ आठ पर रायपुर स्मार्ट सिटी के पत्र क्रमांक 25153 का उल्लेख है। इसमें कथित तौर पर प्रशासनिक एवं कार्यालय व्यय (A&OE) के लिए परियोजना निधि से 1 करोड़ 82 लाख 50 हजार रुपये लेने की जानकारी दी गई है।

ठाकुर ने सवाल उठाया कि विकास कार्यों के लिए निर्धारित राशि को प्रशासनिक खर्च में इस्तेमाल करने की जरूरत क्यों पड़ी और इस राशि के उपयोग की अनुमति किस स्तर पर दी गई। उन्होंने पूरे वित्तीय लेन-देन की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

मिशन खत्म, फिर भी करोड़ों के प्रोजेक्ट अधूरे

शिकायतकर्ता द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, स्मार्ट सिटी मिशन की निर्धारित अवधि 31 मार्च 2025 को समाप्त हो गई थी। इसके बावजूद रायपुर में करीब 27 करोड़ रुपये की लागत वाले तीन प्रोजेक्ट और बिलासपुर में करीब 161 करोड़ रुपये की लागत वाले आठ प्रोजेक्ट अधूरे होने का दावा किया गया है।

ठाकुर का कहना है कि दस्तावेजों में भुगतान पूरा होने और शेष राशि शून्य दिखाए जाने के बावजूद परियोजनाओं का जमीन पर अधूरा रहना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने भुगतान, निर्माण की वास्तविक प्रगति और परियोजनाओं के पूर्णता प्रमाणपत्रों की जांच की मांग की है।

केंद्रीय अनुदान में ₹98 करोड़ की कमी का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रत्येक स्मार्ट सिटी के लिए केंद्र सरकार से 490 करोड़ रुपये तक का अनुदान निर्धारित था। उनके दावे के मुताबिक, रायपुर को 453 करोड़ रुपये और बिलासपुर को 429 करोड़ रुपये मिले। इस आधार पर रायपुर के लिए 37 करोड़ और बिलासपुर के लिए 61 करोड़ रुपये की कमी बताई गई है। दोनों शहरों को मिलाकर यह राशि 98 करोड़ रुपये होती है।

ठाकुर ने आरोप लगाया कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कमियों के कारण छत्तीसगढ़ को केंद्रीय सहायता की पूरी राशि नहीं मिल सकी। हालांकि, अनुदान में कमी के वास्तविक कारणों और इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी की पुष्टि संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और जांच से ही हो सकेगी।

EOW/ACB में शिकायत, जांच के दायरे में वित्तीय प्रबंधन

मनोज सिंह ठाकुर ने बताया कि रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी के कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पहले ही EOW/ACB में शिकायत दर्ज कराई गई है। अब RTI से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने जांच में इन बिंदुओं को शामिल करने की मांग की है।

मामले में प्रमुख सवाल यह हैं कि विकास निधि से प्रशासनिक खर्च में राशि लेने की मंजूरी किसने दी, अधूरे प्रोजेक्ट्स के बावजूद भुगतान और शेष राशि की स्थिति क्या रही तथा केंद्रीय अनुदान में कमी के लिए कौन-से कारण जिम्मेदार थे।

इन आरोपों पर संबंधित स्मार्ट सिटी प्रबंधन, अधिकारियों और जांच एजेंसी का पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

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