कोरिया / कोरिया जिले का कोयलांचल क्षेत्र चिरिमिरी ऐसे भंवर में फंस गया है जो नई नस्लों को बरबादी की तरफ धकेल रहा है। बेरोजगार नौजवान यहां तक की बच्चे भी इस भंवर के चंगुल में फंसकर जिंदगी तबाह कर रहे हैं। ये भंवर किसी भी दौर से ज्यादा खतरनाक है। हालांकि जिस तरह से इसके शिकार लोगों की तादाद बढ़ रही है, उससे नेता, पुलिस व सभ्य समाज सभी गुनहगार नजर आ रहे हैं।
दिन के उजाले में भी नशे का स्याह अंधेरा कोरिया के इस शहर चिरिमिरी में गहराई तक पसरा है। यहां सबसे आसानी से मिलने वाली चीज नशा और नशेड़ी हैं। इनमें अनपढ़, पढ़े-लिखे, अमीर-गरीब हर तरह के लोग हैं। नशे की लत अमीर या गरीब का अंतर नहीं करती, जिसके पास पैसा है वो महंगी नशा खरीद कर पी रहा है, जिसके पास पैसा नहीं है, वो सस्ती। नशे की तलब सभी मिटा रहे है कारण इलाके में नशे के हर समान आसानी से मिल रहे है। गली – गली में गांजे की पूडियां और मुहल्लो के बिच मनचाही शराब बस यही पहचान बन कर रह गई है चिरिमिरी। इलाके में पुलिस तो जरुर है पर इनकी बात न करे तो ही ठीक होगा चुकीं इस तरह आसानी से अवैध कारोबार का चलना इन्ही की तो देन है।
पहले शौक फिर आदत – शुरुआत में नशा शौकिया तौर पर किया जाता है, जो बाद में आदत बन जाता है। सिगरेट, शराब, चरस, अफीम, स्मैक व हेरोइन जैसे नशे मनुष्य को शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप से खोखले कर देते हैं। नशे के चंगुल में फंसकर इंसान न केवल खुद बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है।
आसानी से मिलता नशा – इलाके में नशे के इंग्जेक्शन, ब्राउन शुगर, अफीम, डोडा, टायर पंचर बनाने में उपयोगी बोनफिक्स, खासी के सिरप, बहुतायत में गांजा सहित शराब जो नशेड़ियों को बेहद आसान तौर पर मिल रहे है।
बच्चों के एकाएक बदले स्वभाव पर रखें खास ध्यान – ऐसे परिजन और अभिभावक जिन्हें अभी तक यह नहीं पता कि उनके बच्चे सीरियस तरह की नशोखोरी का शिकार हो चुके हैं। उनको जागरूक करने की जरूरत है। बच्चों के व्यवहार, उनके एकाएक जेब खर्च अधिक मांगने की आदत जैसे लक्षणों को अभिभावक गंभीरता से लें और इसके साथ ही अपने बच्चों को सहयोग कर इस नशाखोरी से उन्हें निजात दिलवाने के लिए आगे आएं।
दु:खद बात – एक समय ऐसा था जब नशीले पदार्थ की बिक्री व सेवन करने वालों की संख्या उंगलियों में गिनी जाती थी। आज इसके शौकीनों की संख्या में तेजी के साथ इजाफा होता जा रहा है। इतना ही नहीं इस अवैध कारोबार में काफी लोग जाने-अंजाने लिप्त हो चुके हैं। दु:खद बात यह है कि ऐसे नशे से शरीर व समाज को होने वाले नुकसान की जानकारी होने के बाद भी इससे तौबा करने को कोई तैयार नहीं है। युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में आकर अपराध के दलदल में फंसता जा रहा है।