लाल साड़ियों में साधारण सी दिखने वालीमहिलाएं कोई आम महिलाएं नहीं बल्कि एसपीओ यानी स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स हैं, जिन्हें पुलिस विभाग की ओर से दोहरी जिम्मेदारी दी गई है। एक पुलिस ऑफिसर पर जहां सिर्फ समाज को अपराधमुक्त करने की जिम्मेदारी होती है, वहीं छत्तीसगढ़ के बालोद ज़िले में ये महिला कमांडो, पुलिस से एक कदम आगे बढ़कर समाज को नशा और गंदगी से मुक्त बनाने की विशेष जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
दरअसल नशे और गंदगी के ख़िलाफ इन महिलाओं ने वर्ष 2006 में पद्मश्री शमशाद बेगम की अगुवाई में संगठित होकर इस अभियान की शुरुआत की थी। अब प्रशासन भी इस नेक काम में अपने हाथ बंटाने सामने आया है। पुलिस की ओर से अब तक बालोद जिले में लगभग 10 हजार से अधिक संख्या में महिला कमांडोज़ तैनात की जा चुकी हैं। जिले के अलग-अलग गांवों में कानून के रक्षक के तौर पर रोज़ाना इन महिलाओं की टोलियों को देखना अब आम चुका है।
इन महिलाओं के हौंसले की उड़ान को पंख देते हुए ज़िला पुलिस बेहतर काम के आधार पर इन्हें पदोन्नत भी करती है। पिछले दिनों बालोद जिला पुलिस द्वारा मिशन पूर्ण शक्ति कार्यक्रम के तहत जिले की सौ और महिला कमांडो को एसपीओ का दर्ज़ा दिया गया जो अपने अपने क्षेत्र मे सुपर पुलिस अधिकारी की तरह कार्य करेंगी और पुलिस के कार्यों मे अपना सहयोग देंगी।
इन महिलाओं की कोशिश रंग ला रही है। नशाबंदी से लेकर स्वच्छता के मामले में जबर्दस्त सुधार हुआ है। सबसे बड़ी बात है कि इन महिलाओं ने लोगों को जागृत किया है और कुछ कर गुज़रने का हौंसला दिया है। महिला कमांडो दल का नारा कि ‘फूल नहीं चिंगारी है , छत्तीसगढ़ की नारी है’ सचमुच आत्मविश्वास तो जगाता ही है, महिला सशक्तिकरण की कहानी भी बयां करता है।