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पिछली बार मनाया जन्मदिन तो मिला था नपा का टिकट इस बार विधानसभा पर नजर

00 जन्मदिन डिप्लोमैसी के बहाने साधा विधानसभा टिकट पर निशाना…?

बैकुण्ठपुर / राजनीति में राजनेता डिनर डिप्लोमैसी के बहाने अपने हितों को साधने में नजर आते रहें है। लेकिन अब बड़े नेताओं के जन्मदिन के बहाने चुनाव की टिकट भी पक्की होती नजर आ रही है। मतलब अपने आका का जन्मदिन बड़े ही धूमधाम से मनाओं और गरीबों को उपहार का वितरण कीजिए तो एकाध टिकट चुनाव का पक्का होना संभव ही है। अभी हाल ही में कांग्रेस के एक बड़े नेता ने अपना ६२वां जन्मदिन मनाते हुए पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकत्र्ताओं से पार्टी भवन बनाने के नाम पर ६२ सौ-६२ सौ के चेक ले लिए। अब बाकी बड़े नेता भी अपने जन्मदिन की तिथि आने का इंतजार करने लगे है।
लगभग २ वर्ष कांग्रेस पार्टी के सामान्य पदाधिकारी रहें अशोक जायसवाल ने कोरिया विकास पुरूष व छग के प्रथम वित्तमंत्री डॉ. रामचन्द्र सिंहदेव का ८५वां जन्मदिन प्रेमाबाग में बड़ी धूमधाम से मनाया। हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए। गरीबों को कम्बल वितरण व भोजन कराया गया। जबरदस्त आयोजन देखकर डॉ. सिंहदेव भी प्रभावित हो गए। नतीजा यह रहा है कि बैकुण्ठपुर नगर पालिका अध्यक्ष का टिकट श्री जायसवाल की झोली में गिरा और वह चुनाव जीत भी गए। विदित हो कि कोरिया जिले खासकर बैकुण्ठपुर की राजनीति मे वयोवृद्ध डॉ. रामचन्द्र सिंहदेव की पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी उनके विधायक या मंत्री रहते हुए हुआ करती थी। उनकी मर्जी से ही कांग्रेस आलाकमान नगरीय निकाय या विधानसभा के टिकट तय करती है। तो बात करते है पिछले जन्मदिन की तो उस वक्त बर्थ-डे की तैयारी के समय ही नपा के अन्य दावेदारों को लग गया था कि अब उनकी टिकट मुश्किल है। यहां यह भी जानना लाजमी है कि वर्ष २००९ में भी नगर पालिका चुनावों में अशोक जायसवाल ने बड़े जोर-शोर से दावेदारी की थी, परन्तु उन्हें टिकट नहीं मिला था और वह मायूस होकर कुछ दिन सक्रिय राजनीति से दूर भी रहें। हालांकि फिर पार्टी कार्यक्रमों में वह नजर आने लगे थे। अब जबकि छग के विधानसभा चुनावों में महज २ साल से भी कम का समय बचा है ऐसे में राजनीतिक पंडि़तों को चौकाते हुए अशोक जायसवाल ने एक फिर बड़ी धूमधाम से डॉ. सिंहदेव का जन्मदिन मना डाला है। जिसके बाद राजनीतिज्ञ ऐसे कयास लगा रहे है कि ये बर्थ-डे डिप्लोमैसी के बहाने कहीं अशोक जायसवाल ने विधानसभा टिकट पर तो निशाना नहीं साध दिया है। नगर पालिका अध्यक्ष बनने के बाद जिस तरह वार्डो में भ्रमण के दौरान लोगों से मिलने से उनका जनाधार बढ़ रहा है उससे इस तरह का उत्साह आना आवश्यक भी है। हालांकि कांग्रेस की टिकट पर दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके पीसीसी सदस्य वेदांती तिवारी लगातार दो चुनाव हार भी चुके है। बावजूद इसके अभी भी वह दावेदार की सूची में प्रबल है। वहीं जिला महामंत्री योगेश शुक्ला भी पिछले चुनाव की तरह इस बार भी विधानसभा के जबरदस्त दावेदार है। डॉ. चरणदास महंत व टीएस सिंहदेव का आशीर्वाद मिलने के बाद भी डॉ. सिंहदेव का आशीर्वाद न मिल पाने से वह पिछली बार टिकट से वंचित हो गए थे। इस बार भी हालात लगभत ऐसे ही नजर आ सकते है। अब तीसरे दावेदार अशोक जायसवाल के ताल ठोकने पर बाकी दावेदार सन्नाटे में है। वहीं राजवाड़े समुदाय का होने की दुहाई देकर चन्द्रप्रकाश राजवाड़े भी बड़े नेताओं का आशीर्वाद पाने की तैयारी में है। हालांकि उन्होंने अभी तक किसी बड़े नेता का जन्मदिन मनाया नहीं है। अब अशोक जायसवाल जो कि वेदांती तिवारी के काफी करीबी भी है। ऐसे में विधानसभा दावेदारी से दोनों के संबंध में पहले जैसी प्रगाढ़ता रह पायेगी की नहीं यह प्रश्न उठना अब लाजिमी है। वहीं नपा अध्यक्ष बनने के बाद से अशोक जायसवाल की टीम और मजबूर हो रही है। उनके सर्मथकों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में कहीं कांग्रेस से उनको अगला विधानसभा टिकट मिल जाए तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। अब यदि कांग्रेस ने २०१९ में अशोक जायसवाल को टिकट दिया तो बाकी दो दावेदारों में से एक जनता कांग्रेस छग (जोगी) में चला जाए तो भी किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

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