रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वन विभाग एवं विधि-विधायी विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के बाद 31 मार्च 2018 को समाप्त होने वाले आगामी एक वर्ष के लिए कुल 1377 करोड़ 62 लाख 28 हजार रूपए का वार्षिक बजट पारित किया गया।
इसमें वन विभाग के लिए 1017 करोड़ 25 लाख 80 हजार तथा विधि-विधायी विभाग के लिए 360 करोड़ 36 लाख 48 हजार रूपए का बजट शामिल है। अनुदान मांगों की चर्चा में 16 विधायकों ने हिस्सा लिया। इन विभागों के प्रभारी मंत्री महेश गागड़ा ने सदन में लगभग साढ़े तीन घण्टे चली चर्चा का जवाब देते हुए बताया कि राज्य में वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए दो राष्ट्रीय उद्यान, तीन अभ्यारण्य तथा दो टाईगर रिजर्व गठित है। राष्ट्रीय उद्यानों एवं उन अभ्यारण्यों में निवास करने वाले 22 हजार 390 परिवारों को दो हजार रूपए प्रति परिवार की दर से चार करोड़ 38 लाख 36 हजार रूपए की सहायता दी गई है। उन्होंने बताया कि जंगली हाथियों से प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति भुगतान 09 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से आरबीसी के प्रावधानों के अंतर्गत भुगतान करने के बाद प्रति एकड़ अंतर की राशि का भुगतान कैम्पा मद से किया जा रहा है।
वर्ष 2016-17 में 31 जनवरी 2017 तक की स्थिति में जंगली हाथियों से हुई हानि के लिए बारह करोड़ 14 लाख 84 हजार तथा भालू से हुई हानि के लिए 84 लाख 09 हजार की आर्थिक सहायता बतौर मदद दी गई। श्री गागड़ा ने बताया कि वन्य प्राणी प्रबंधन से संबंधित विभिन्न मदों की योजनाओं के अंतर्गत वर्ष 2017-18 के लिए धन राशि बढ़ाकर एक करोड़ 86 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।
जंगल सफारी में दो दिन पहले तक 1.41 लाख से
अधिक पर्यटकों ने किया भ्रमण –
वन मंत्री श्री गागड़ा ने बताया कि नया रायपुर में 791 एकड़ में विकसित जंगल सफारी में आठ मार्च 2017 तक एक लाख 41 हजार 713 पर्यटकों ने भ्रमण किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक नवम्बर 2016 को जंगल सफारी का लोकार्पण किया था। विगत लगभग चार माह में ही इतनी संख्या में लोगों ने जंगल सफारी का आनंद लिया। श्री गागड़ा ने बताया कि नया रायपुर में ही 400 हेक्टेयर क्षेत्र में बॉटनिक गार्डन बनाया जा रहा है।
तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक में बढ़ोत्तरी: अब प्रति मानक बोरा
1800 रूपए का मिलेगा पारिश्रमिक –
वन मंत्री श्री गागड़ा ने सदन में बताया कि प्रदेश के 13 लाख से अधिक वनवासी परिवार तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े हुए हैं। यह वनवासियों खासकर अनुसूचित जनजाति परिवारों की आय का महत्वपूर्ण साधन है। राज्य शासन ने वनवासियों के हितों को ध्यान में रखकर इस साल से तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब 1500 रूपए की जगह 1800 रूपए का पारिश्रमिक प्रति मानक बोरा मिलेगा। वन मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016-17 में जनश्री बीमा योजना के तहत छह हजार 196 दावा प्रकरणों में बीस करोड़ 25 लाख रूपए का भुगतान किया गया। इसी प्रकार सामूहिक बीमा योजना में दो हजार 726 दावा प्रकरणों में दो करोड़ 98 लाख रूपए का भुगतान किया गया है।
तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला सदस्यों को दी जाएगी साड़ी –
श्री गागड़ा ने बताया कि प्रदेश के 12 लाख 50 हजार तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला सदस्यों को शीघ्र ही चरणपादुका के रूप में एक जोड़ी चप्पल प्रदान करने की कार्रवाई प्रगति पर है। अगले वित्तीय वर्ष 2017-18 में तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के एक पुरूष सदस्यों को एक जोड़ी चरणपादुका एवं महिला सदस्यों को एक साड़ी देने का निर्णय लिया गया है। कैम्पा निधि में केन्द्र सरकार से राज्य सरकार को अब तक 1013 करोड़ 23 लाख रूपए राशि प्राप्त हुई है। इसमें से जनवरी माह तक 811 करोड़ रूपए के अनेक विकास कार्य कराए गए हैं। राज्य कैम्पा मद के अंतर्गत प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत प्रदेश के वन बाहुल्य जिलों के तीन लाख 90 हजार परिवारों के महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन देने के लिए 47 करोड़ 47 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई है।
सौर सुजला योजना में 835 सोलर वाटर पम्प लगेंगे
कैम्पा मद से 34.70 करोड़ रूपए मंजूर –
श्री गागड़ा ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में विद्युत विहीन क्षेत्रों के किसानों को सिंचाई के लिए सुजला योजना के तहत 835 सोलर वाटर पम्पों की स्थापना के लिए 34 करोड़ 70 लाख रूपए की राशि कैम्पा मद से स्वीकृत की गई है। इसी तरह विद्युत विहीन वनांचलों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 11 करोड़ 42 लाख रूपए की लागत से 222 सोलर वाटर पम्पों की स्थापना की गई है। उन्होंने बताया कि सघन वन क्षेत्रों में निवासरत 56 हजार 136 विशेष पिछड़ी जनजाति समूह के प्रत्येक परिवार को दो-दो कंबल देने के निर्णय के तहत अब तक 12 हजार 272 नग कंबलों के वितरण पर दो करोड़ 81 लाख रूपए व्यय की गई।
हरियर छत्तीसगढ़ योजना में 7.42 करोड़ पौधे लगाए गए –
वनों के विकास के लिए हरियर छत्तीसगढ़ के नाम से वृक्षारोपण अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत वन विभाग द्वारा सात करोड़ 42 लाख पौधे रोपित किए गए है। श्री गागड़ा ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य औषधि पादप बोर्ड द्वारा औषधि उद्यान का विकास किया गया है। इसमें 250 औषधि पादप रोपित किया गया है। बांस बाड़ी योजना के तहत वर्ष 2016-17 में दो लाख 82 हजार बांस के पौधे किसानों के निजी भूमि पर लगाए गए। आगामी वित्तीय वर्ष 2017-18 में दस करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।
ग्यारह विशेष न्यायालयों की स्थापना व्यय
के लिए 6.21 करोड़ रूपए से अधिक का प्रावधान –
श्री गागड़ा ने विधि और विधायी कार्य विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान बताया कि अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति वर्गों के हितों की सुरक्षा के लिए राज्य के ग्यारह जिलों बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर, अम्बिकापुर, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा, जशपुर, कोरिया, कोरबा एवं रायगढ़ में विशेष न्यायालय स्थापित है। इन न्यायालयों की स्थापना व्यय के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 में छह करोड़ 21 लाख 80 हजार रूपए का प्रावधान किया गया है। न्याय व्यवस्था सुदृढ़ बनाने के लिए अधोसंरचना विकास के तहत राज्य में आवश्यकतानुसार न्यायालय भवनों के निर्माण के लिए 21 करोड़ 15 लाख 18 हजार रूपए और न्यायिक अधिकारियों के आवास निर्माण के लिए 19 करोड़ 40 लाख 45 हजार रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में न्यायालयों के आधुनिकीकरण के लिए ई-कोर्ट मिशन मोड प्रोजेक्ट के अनुसार न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है।
