Advertisement Carousel

नवरात्र के नौ दिन नौ रूपों के महत्व अनेक…

प्रथम नवरात्र

शैलपुत्री- प्रथम नवरात्र में पर्वतराज हिमालय के यहां उत्पन्न हुई देवी को शैलपुत्री दुर्गा के नाम से पूजा  जाता है। दैवी उत्साह की प्राप्ति व जड़ता का नाश करने वाली मानी जाती हैं शैलपुत्री।

द्वितीय नवरात्र

ब्रह्मचारिणी- द्वितीय नवरात्र में कठिन तप करके शिवजी को पति के रूप में प्राप्त करने वाली देवी का पूजन ब्रह्मचारिणी नाम से किया जाता है। ब्रह्मचारिणी दुर्गा की पूजा करने से जप-तप-त्याग और सदाचार में वृद्धि होती है।

तृतीय नवरात्र

चंद्रघंटा- तृतीय नवरात्र में पूजनीय दुर्गा का रूप है। भक्तों को प्रसन्न व पापियों को भयभीत करने के लिए चन्द्रघंटा नाद करती हैं और उपासकों को संसार के चक्रों से छुटकारा दिला लोक परलोक से सद्गति प्रदान करती हैं।

चतुर्थ नवरात्र

कूष्मांडा- खेल-खेल में ब्रह्मांड उत्पन्न करने वाली दुर्गा के इस रूप की पूजा चतुर्थ नवरात्र में होती है। इनकी उपासना से जटिल से जटिल रोगों से मुक्ति मिलती है और आरोग्यता के साथ-साथ आयु और यश की प्राप्ति होती है।

पंचम नवरात्र

स्कंदमाता- शिव-पार्वती के पुत्र ‘स्कंद’ की माता होने से इन्हें स्कंदमाता के रूप में पंचम नवरात्र को पूजा जाता है। पूजाफल के रूप में परमशक्ति व सुख की प्राप्ति होती है।

छठा नवरात्र

कात्यायनी- महर्षि कात्यायन की पत्नी की तपस्या फल के रूप में, पुत्री बनकर प्रकट होने से दुर्गा के छठे रूप को, छठे नवरात्र में कात्यायनी नाम से पूजा जाता है। पूजन से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति के साथ-साथ विवाह में आती बाधाओं को दूर कर कन्याओं को इच्छित वर की प्राप्ति होती है।

सप्तम नवरात्र

कालरात्रि- काल का भी काल बनने वाली, महाकाल शिव की पत्नी का यह रूप ‘कालरात्रि दुर्गा’ के नाम से सप्तम नवरात्र में पूजा जाता है।

अष्टम नवरात्र

महागौरी दुर्गा- शिव भगवान की असीम व महान तपस्या करके उन्हें पति के रूप में पाने वाली ‘शक्ति’ को अष्टम नवरात्र में महागौरी दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। धन, तेज, यश, सम्मान व आत्मबल से युक्त करती हैं देवी अपने भक्तों को।

नौवां नवरात्र
सिद्धिदात्री- भगवान शिव द्वारा पूजित, इस देवी की कृपा से शिव जी का भी आधा अंग ‘सिद्धि शक्ति प्रदायिनी’ हो जाने के फलस्वरूप नौवें रूप में, नौवें नवरात्र को अधिष्ठात्री देवी ‘माता सिद्धिदात्री’ नाम से परम पूजनीय है। इनकी उपासना, लौकिक, पारलौकिक, कामनाओं की पूर्ति करती है।

उपासना मंत्र – क्रमानुसार (एक से नौ नाम) श्री दुर्गा, नम: मंत्र का जाप करें या फिर सर्व प्रकार के रूपों में मां भगवती के एक ही महामंत्र का जाप कर सकते हैं-
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नमोअस्तुते।।

पूजन के बाद अपनी-अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार प्रसाद आदि अवश्य भेंट करें।

error: Content is protected !!