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शिक्षाकर्मी हड़ताल, अपनी माँगों पर अड़े शिक्षक

महासमुंद / प्रदेश में 20 नवम्बर से शिक्षाकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है, प्रदेश सहित पूरे देश की मिडिया का भरपूर कवरेज मिल रहा है। एक लाख अस्सी हजार शिक्षाकर्मी रमन सरकार के खिलाफ धरनारत हैं। छत्तीसगढ़ के सभी विकासखण्डों सहित महासमुंद, सरायपाली, बसना में भी शिक्षक जंगी प्रदर्शन एवं धरनास्थल पर प्रदेश सरकार खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

आक्रोशित शिक्षाकर्मी धरनास्थल से लेकर सोशल मिडिया तक सरकार को कोस रहे हैं, कांग्रेस शासन के खिलाफ 2002-03 में धरनारत् रहे शिक्षाकर्मियों को तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष एवं वर्तमान मुख्यमंत्री रमन सिंह द्वारा दिये गये समर्थन पत्र, संकल्प पत्र एवं फोटो शेयर कर तंज कस रहे हैं, शिक्षाकर्मियों सहित सोशल एक्टविस्ट (क्या हुआ तेरा वादा) का हैसटेग चला रहे हैं। ट्वीटर पर संख्या कम होन की वजह से ये हैसटेग ट्रेडिग नहीं कर पा रहा है। सरायपाली के एक व्याख्याता पंचायत अनिल प्रधान का एक व्हाट्एप्प मैसेज खूब वायरत हो रहा है जिसमें उन्होंने आम जनता को संबोधित करते हुए लिखा है कि आप ही के बीच से जो थोड़ी सी योग्यता और व्यापमं द्वारा आयोजित बहुत ही सरल परीक्षा पास करके शिक्षाकर्मी बन गए हैं वो हम हैं, आज हमारा वेतन और कार्य का आंकलन करना है तो हमारे साथ बैठकर चर्चा करें। वर्तमान में जो हड़ताल हो रही है उसके सन्दर्भ में बताते हुए वो लिखते हैं हम लोग गत 22 वर्षों से खुली स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं पर शासन नही दे रही है। शासकीय कार्यों के लिए यात्रा भत्ता मांग रहे शासन नहीं दे रही है, मेडिकल भत्ता हर कर्मचारी का अधिकार है शासन नही दे रही है, अनुकम्पा मृत कर्मचारी के आश्रित कर्मचारी का अधिकार है शासन ने इसे असाध्य कर दिया है। क्रमोन्नति हर शासकीय कर्मचारी का अधिकार है शासन इसे नहीं दे रही है, हर माह समय पर वेतन हर कर्मी का अधिकार है शासन यह व्यवस्था भी नही कर पा रही है, हर पालक को अपने बच्चों की फिक्र है आप के बच्चों को हम अभी नहीं पढ़ा पा रहे है यह सत्य है। हम इसकी भरपाई करने के लिए वचनबद्ध हैं प्रधान ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब केंद्रीय विद्यालय नवंबर में चालू होकर अपनी कोर्स निश्चित अवधि में पूर्ण कर सकते हैं तो हमारे में भी सामथ्र्य है की हम कुछ दिनों के हड़ताल से वापस आने पर हड़ताल अवधि नुकसान की भरपाई करेंगे, आगे कहते हैं आज 22 वर्षों से हम भी आप ही की भाँति अपने स्वयं के बच्चों के भविष्य के लिए सड़क की लड़ाई लडऩे पर मजबूर हैं एवं हम 1995 से उपेक्षित हैं, हमारा हड़ताल वैधानिक है या नही ये निर्णय कोर्ट को संज्ञान लेकर करना चाहिए। वहीं एक अन्य शिक्षक जो पीएससी की तैयारी भी कर रहे हैं ने कहा कि चुनाव कार्य, जनगणना कार्य, सर्वे, स्वच्छ भारत के तहत घर-घर जाकर जागरूकता अभियान सहित अन्य शासकीय कार्य को करते हैं फिर भी सरकार को हमसे जरा भी हमदर्दी नहीं है न हीं सरकार हमें सरकारी कर्मचारी मानती है।

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समाजिक संस्था जाग्रत युवा मंच के सदस्य चुम्मन माँझी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार किसी की भी हो शिक्षाकर्मी डंडा खाते हैं या पीड़ीत होते हैं लेकिन इसमें नुकसान शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत गरीब बच्चों का ही होता है सरकार तत्काल इस दिशा में सकारात्मक एवं ठोस पहल करे या कोर्ट संज्ञान में ले और निराकरण करे।

प्रदेश में हड़ताली शिक्षकों के संबंध में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता विश्वजीत बेहेरा ने कहा कि अनिश्चितकालीन हड़ताल के जिम्मेदार डॉ. रमन सिंह है, 2003 में हुए आम चुनाव में जीत पश्चात शिक्षाकर्मियों की माँग पूर्ण करने का वादा किया गया था, लेकिन प्रदेश चुनाव जीतते ही मांगों से मुकर गई।

सरायपाली में रूपानंद पटेल के नेतृत्व में शिक्षाकर्मियों का धरना जारी है बीईओ कार्यालय के सामने धरनारत शिक्षाकर्मियों की सभा जारी है विभिन्न दला तथा सामाजिक कार्यकत्र्ताओं का समर्थन मिल रहा है।

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