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एस्ट्रोसिटी पर छत्तीसगढ़ में सुप्रीमकोर्ट का फैसला लागू, क्या गरमा सकती है छत्तीसगढ़ की दलित सियासत

रायपुर / सुप्रीम कोर्ट के एस्ट्रोसिटी पर जिस फैसले को लेकर देश में विवाद के बवाली स्वर गूंज रहे हैं, उस फैसले पर छत्तीसगढ़ में क्रियान्वयन शुरु हो गया है। राज्य पुलिस मुख्यालय ने छत्तीसगढ़ के सभी जिला पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का कड़ाई से पालन करें वरना उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तो होगी ही, सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना के दोषी भी होंगे।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अअवि) आरके विज ने 6 अप्रैल को सभी पुलिस अधीक्षकों जिसमें रेल एसपी भी शामिल हों को यह निर्देश पत्र जारी किया है।

ये लिखा है पत्र में – सुप्रीम कोर्ट की क्रिमिनल अपील नंबर 416, 2018 डॉ. सुभाष काशीनाथ महाजन विरूद्ध महाराष्ट्र राज्य व अन्य में एससी एसटी अधिनियम के दुरपयोग पर रोक लगाने के लिए दिशा निर्देशों के पालन करने पुलिस अधीक्षकों से कहा गया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के 20 मार्च 2018 के फैसले का उल्लेख करते हुए सर्वोच्च अदालत द्वारा अजा.जजा अत्याचार निवारण अधिनियम 1989) के प्रावधानों का दुरपयोग रोकने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।

ये हैं निर्देश – अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों में अग्रिम जमानत स्वीकार करने में कोई रोक नहीं है। अगर प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है या जहां न्यायिक स्क्रूटनी पर शिकायत प्रथम दृष्टया झूठी पाई जाती है।

अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामले में केवल नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी की लिखित अनुमति से और गैर सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अनुमति के बाद हो सकती है। स्वीकति के दिए जाने के कारणों का उल्लेख प्रत्येक मामले में किया जाना आवश्यक है। मजिस्ट्रेट के उक्त कारणों की स्क्रूटनी किए जाने के बाद ही आगामी अभिरक्षा का आदेश देगा।

एक निर्दोष को झूठा फंसाने से बचाने के लिए प्रारंभिक जांच हो सकती है। जो संबंधित उप पुलिस अधीक्षक के द्वारा यह पा लगाने के लिए कि आरोपों में अत्याचार निवारण अधिनियम का अपराध बनता है या नहीं और वह आरोप तुच्छ या उत्प्रेरित तो नहीं है। पत्र में आगे लिखा गया है कि इस निर्देश की कंडिका 2 व 3 का पालन नहीं किए जाने पर संबंधित दोषी(पुलिस अधीक्षक) पर अनुशासनात्मक कार्यवाही के साथ सुप्रीमकोर्ट की अवमानना की कार्यवाही भी होगी। यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। शनिवार रात बसपा से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इसे सोशल मीडिया के माध्यम से अपने समर्थकों के बीच भेजा। रविवार कि सुबह कांग्रेस मीडिया विभाग की और से भी संवाददाताओं को भेजा गया। पत्र के सम्बन्ध में जानकारी और पुष्टि के लिए ADG आरके विज से संपर्क किया गया तो उन्होंने पुष्टि की और कहा सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जा रहा है।

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