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कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष को DFO ने किया निलंबित

00 डीएफओ के तानाशाह रवैये से त्रस्त है कर्मचारी

00 कर्मचारी संघ की बैठक में डीएफओ को हटाने की मांग को लेकर लिखा गया था पत्र

बैकुण्ठपुर वनमण्डलधिकारी के तानाशाह रवैये से त्रस्त कर्मचारियों में अब अंदर ही अंदर आक्रोश पनप रहा है।वन कर्मचारी संघ इनके कार्यशैली को लेकर हाल ही में बैठक लेकर उच्च अधिकारियों को पत्र प्रेषित कर आंदोलन की शुरूवात करने ही वाले थे कि इसके पूर्व ही इसका खामियाजा वनपाल परिक्षेत्र सहायक पवन रुपौलिहा को भुगतना पड़ा। जिसका कारण यह था कि इन्होंने अपने वन कर्मचारी संघ के लेटर पेड़ में अध्यक्ष के तौर पर राज्य के उच्च अधिकारियों व शासन को डीएफओ के खिलाफ पनप रहे आक्रोश के खिलाफ लेटर लिखकर कार्य न कर इन्हें हटाने को लेकर आंदोलन कर विरोध करने की बात की। जिस कारण आंदोलन के पूर्व ही डीएफओ ने कार्य मे लापरवाही बता निलंबन आदेश जारी कर यह साबित कर दिया कि उनके तानाशाही के आगे किसी का कोई अस्तित्व नही है।

डीएफओ को नही है अधिकार – निलंबित करने का अधिकार वनमण्डलधिकारी को नही है ऐसा कहना है छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष सतीश मिश्रा का। निलंबन की कार्यवाही को उन्होने दुर्भावनापूर्ण बताया और डीएफओ के इस आदेश को चुनौती देने की बात कही। साथ ही वन कर्मियों के साथ हो रहे अत्याचार को लेकर जल्द ही उग्र आंदोलन की चेतावनी दी वही सरगुजा में ऐसे ही आदेश को लेकर वहा के डीएफओ द्वारा अपने ही आदेश को संसोधन करने का हवाला भी दिया।

बैकुण्ठपुर वनमण्डलधिकारी मनीष कश्यप के तानाशाही रवैये को लेकर भरतपुर सोनहत विधायक व सरगुजा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुलाब कमरों ने कहा कि जिले में ऐसे अधिकारी को बर्दाश्त नही किया जाएगा। 

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