रायपुर / छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को तगड़ा झटका लगा है. हाईप्रोफाइल अंतागढ़ टेपकांड मामले में अजीत जोगी और अमित जोगी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई है. जोगी ने पंडरी थाने में दर्ज FIR पर अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। यह जमानत याचिका 4th एडीशनल सेशन जज विवेक कुमार वर्मा की कोर्ट में लगी थी. जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है.
जानकारी के मुताबिक, एडीजे विवेक कुमार वर्मा ने अजीत जोगी की बेल पिटिशन खारिज कर दी है. कोर्ट में सुनवाई के बाद इस मामले में फैसला आया है. बता दें कि रायपुर के पंडरी थाने में दर्ज की गई एफआईआर के खिलाफ अजीत जोगी ने याचिका लगाई थी. अजीत जोगी के वकील एसके फरहान ने कहा कि अब अग्रिम बेल के लिए बिलासपुर हाइकोर्ट जाएंगे.
अंतागढ़ टेपकांड मामले में कांग्रेस नेत्री डॉ. किरणमई नायक की शिकायत पर पंडरी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी. IPC 1860 की धारा 406, 420 171-ई, 171-एफ, 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया था. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 9 और 13 के तहत भी मामला दर्ज हुआ था. शिकायतकर्ता किरणमई नायक का कहना था कि मामले को लेकर 2016 में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत का रिमाइंडर 2017 में पुलिस को दिया गया था. तात्कालिक सरकार ने मामला दर्ज नहीं होने दिया था. तात्कालिक सीएम के परिजन का नाम होने से नहीं कार्रवाई नहीं हुई थी. उसी शिकायत को अब री-राइट करके FIR कराया गया है.
साल 2014 में अंतागढ़ के तत्कालीन विधायक विक्रम उसेंडी ने लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद इस्तीफा दिया था. वहां हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने पूर्व विधायक मंतू राम पवार को प्रत्याशी बनाया था. भाजपा से भोजराम नाग खड़े हुए थे. नाम वापसी के अंतिम वक्त पर मंतूराम पवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था. इससे भाजपा को एक तरह का वाकओवर मिल गया था. बाद में फिरोज सिद्दीकी नाम से एक व्यक्ति का फोन कॉल वायरल हुआ था. आरोप लगे थे कि तब कांग्रेस में रहे पूर्व सीएम अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी ने मंतू की नाम वापसी कराई. टेपकांड में कथित रूप से अमित जोगी और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता के बीच हुई बातचीत बताई गई थी.
