कोरिया से नीरज गुप्ता की रिपोर्ट / राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत चंद शहरों में नहीं अपितु सात लाख गांव में बसता है इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि आजादी नीचे से शुरू होनी चाहिए गांव के विकास से ही समग्र विकास संभव है गांधीजी की यह सोच कोरिया जिला मुख्यालय मैं स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है।
कोरिया जिला मुख्यालय में नाममात्र के विभागों को छोड़कर लगभग सभी मुख्य विभागों के कार्यालय ग्राम पंचायतों में है कोरिया जिला का मुख्यालय बैकुंठपुर इसका स्पष्ट प्रमाण है कोरिया जिला मुख्यालय का कलेक्टर कार्यालय भवन, जिला पंचायत कार्यालय भवन, जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय, जिला खनिज अधिकारी कार्यालय, संयुक्त कार्यालय भवन, जिला न्यायालय भवन, जिला महिला बाल विकास कार्यालय, प्रधानमंत्री सड़क योजना कार्यालय, कृषि महाविद्यालय आदि ग्राम पंचायत चेरवा पारा में स्थित है।
वही राजा रामानुज प्रताप सिंह देव पीजी कॉलेज, गर्ल्स कॉलेज, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, ऑडिटोरियम आदि ग्राम पंचायत तलवापारा में आते हैं।
इसी क्रम में पॉलिटेक्निक कॉलेज, लाइवलीहुड कॉलेज, जिला स्तरीय स्टेडियम, कृषि विज्ञान केंद्र, कोसा टसर उद्योग, डाइट भवन आदि ग्राम पंचायत सलवा में आते हैं।
जिले के मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी का कार्यालय भी ग्राम पंचायत कंचनपुर में ही है और जिला परिवहन अधिकारी का कार्यालय ग्राम पंचायत रामपुर में आता है।
गौरतलब है कि जिला मुख्यालय के सभी पेट्रोल पंप भी विभिन्न ग्राम पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत हैं इस प्रकार जिले से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यालय कोरिया जिले के गांव में बसते हैं।
कोरिया जिले के शहरी क्षेत्र बदल रहे हैं ग्राम पंचायतों में…………. आपने गांव को शहर बनते देखा होगा, लेकिन जिले में यह स्थिति है कि जिले के कई शहरी क्षेत्र गांव में तब्दील हो रहे हैं वह भी जिला मुख्यालय के, इसे यूं भी कहा जा सकता है कि अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा जिसकी वजह से शहर गांव में बदल रहे हैं। लगभग 10 वर्ष पूर्व नगर पंचायत शिवपुर चरचा में सघन आबादी वाले ग्राम पंचायत सरड़ी व ग्राम पंचायत खरवत कि लगभग 5 हजार आबादी को जोड़कर नगर पालिका शिवपुर चरचा बनाया गया था इन 10 वर्षों की अवधि में इन ग्रामीण क्षेत्रों में नगरपालिका के माध्यम से करोड़ों रुपए विकास कार्यों में खर्च किए गए लेकिन अब 10 वर्ष बीतने के बाद नगरपालिका शिवपुर चरचा के शहरी क्षेत्र स्थित इन 5 वार्ड को ग्राम पंचायत सरडी व खरवत में तब्दील कर दिया गया।
इसी क्रम में जिला मुख्यालय बैकुंठपुर की नगर पालिका के 5 वार्ड को अलग कर कई ग्राम पंचायतों में बदल दिया गया यह सोच का विषय है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद विकास क्यों नहीं हो पाया। शहरी क्षेत्रों को ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तित करने की जरूरत क्यों पड़ी, इस कड़ी में विकास ना होने के लिए किसे जिम्मेदार माना जाए।
पूर्व की रमन सरकार ने भी छत्तीसगढ़ के विकास की बात कही थी वही बातें वर्तमान सत्तारूढ़ प्रदेश की भूपेश सरकार कह रही है लगातार विकास हो रहे हैं तो शहर गांव में क्यों बदल रहे हैं।
