कोरिया वनमण्डल में हूटर वााले रेंजर की शासकीय वाहन शराब दुकान में दिखें तो बात का बतंगड़ बनना लाजमी हैं चूंकि यह सरासर गलत हैं और फिर इनसे जब कोई इस चूक के बारे में सवाल करें तो इनका जवाब आता हैं मेरा ड्राइवर गाड़ी लेकर गया था आपको जो छापना हैं छाप दिजिए।
खैर आपको बता दे कि बैकुंठपुर में इन दिनों एक डीएफओ एक एसडीओ और एक रेंजर होने की बात लोगों के समझ में नही आ रहा है। आखिरकार पूरे वनमण्डल में एक डीएफओ के अलावा दो उप वनमंडलाधिकारी और पांच परिक्षेत्र है फिर भी एक डीएफओ एक एसडीओ और एक रेंजर वाली बात क्यू हो रही है ? आइये आगे बढ़ते हैं…
दरअसल इस वन मण्डल में दो उप वनमण्डल और पांच परिक्षेत्र है जहां दोनों उप वनमण्डल का कामकाज इन दिनों एक ही एसडीओ के भरोसे है, वही पांच परिक्षेत्रों में एक वनपाल (रेंजर ) है बाकी परिक्षेत्रों में प्रभारी वनपाल ही सेवा देकर शासकीय कार्य सम्पन्न करा रहे है।
प्रभारी वनपाल की बात करें तो अपने सेवानिवृत्त के करीब पहुँचने वाले सोनहत रेंज के प्रभारी रेंजर काफी शौकीन मिजाज के है। शासकीय वाहन में हूटर बजाते कभी भी बैकुंठपुर स्थित सरकारी शराब दुकान में इनके वाहन को आसानी से देखा जा सकता है। यही नही प्रभारी रेंजर होने के बाद भी इनका रुतबा किसी रेंजर से कम नही है। अपने कार्यक्षेत्र में कम और ज्यादा समय बैकुंठपुर में और शासकीय वाहन में अपने निज निवास अम्बिकापुर आना जाना करके ही अपने सेवानिवृत्त का इंतज़ार कर रहे है।
00 हूटर वााले रेंजर श्री श्री आदरणीय …..से जब हमनें सवाल किया की आपकी शासकीय वाहन शराब दुकान में शराब लेने गई थी और आप स्वयं गए थे तो उनका जवाब था कि मैं नही गया था मेरा ड्राइवर गाड़ी लेकर बैकुण्ठपुर गाड़ी बनवाने गया था आप छाप दीजिए, आपको जो छापना हैं छाप दिजिए। जबकि सोनहत के प्रभारी रेेंजर एस मिश्रा बैकुण्ठपुर आए थे, उन्होंने झूठ बोला कि वो सोनहत में थे।
00 बदसलूकी का लगता रहा है आरोप – अपनी रुतबा और अलग पहचान को कायम रखने में माहिर प्रभारी रेंजर कभी कभार खुद का आपा खो मीडिया से भी बदसलूकी करने से नही चूकते। इनके परिक्षेत्र में वनों की अवैध कटाई, वन भूमि पर अवैध कब्जा, परिक्षेत्र में वन विकास और रोजगार मूलक कार्यों में भ्रष्टाचार पर सवाल पूछने पर हमेशा मीडिया से दुर्व्यवहार करने पर ये तनिक भी गुरेज नही करते।
सूत्र बताते हैं कि प्रभारी वनपाल इस ओहदे के अनुरूप खुद को ढालने बहुत प्रयास कर रहे है पर पूरा समय इधर उधर में ही व्यतीत करने के चक्कर मे इनकी शिकायत भी शासन स्तर पर हो चुकी है। जिसके फलस्वरूप इनके स्थांतरण की बात भी सामने आ रही थी। लेकिन कोरिया वनमण्डल में जो जब तक चाहे एक स्थान पर रह सकता हैं। शायद इस लिए अभी तक ये महाशय बिना परवाह किये कुर्सी पर बैठ मनमानी करते फिर रहे है।
