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हर्षवर्धन दुबे ने रचा इतिहास, संगीत के क्षेत्र में भारत मे प्रथम, छत्तीसगढ़ का बढ़ाया मान

कोरिया / एन सी.आर.टी. ( NCRT ) द्वारा आयोजित कला उत्सव में हर्ष वर्धन दुबे ने भारत में प्रथम स्थान प्राप्त कर छत्तीसगढ़ की शान बढाई है। इस वर्ष NCRT द्वारा 37 वां कला उत्सव आयोजित कराया गया । इस कार्यक्रम में तीन पड़ाव होते हैं । तीनो पड़ाव में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थी को NCRT की ओर से प्रस्तुती देने का स्वर्णिम अवसर मिलता है जिसमें भारत के सभी शिक्षा बोर्ड जैसे CBSC , Icsc . IP . NIOS , ICSE , Stati Bord के चयनित विद्यार्थी प्रस्तुति देते है।


04 दिसम्बर 2020 को अम्बिकापुर में कला उत्सव का क्लसटर लेवल आयोजित हुआ जिसमें 06 विद्यालयों के चयनित विद्यार्थियों ने बढ़ – चढ़ कर हिस्सा लिया । इस कार्यक्रम में केन्द्रिय विद्यालय झगराखाण्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे कक्षा 11 वीं गणित के छात्र हर्ष वर्धन दुबे ने प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय के साथ ही पूरे कोरिया जिले को गौरान्वित किया एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए।


06 दिसम्बर 2020 को खैरागढ़ में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 38 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने शानदार प्रस्तुति दी जिसमें हर्ष वर्धन दुबे की प्रस्तुति को सर्वोत्तम प्रस्तुति बताते हुए प्रथम स्थान देकर सम्मानित किया गया । 14 दिसम्बर 2020 को कला उत्सव की राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता लखनऊ में आयोजित कराई गई । इसमें भारत के 28 राज्यों एवं 02 केन्द्र शासित प्रदेशों के केन्द्रिय विद्यालयों के चयनित विद्यार्थियों ने उत्तम प्रस्तुति देकर अपने – अपने राज्य का प्रतिनिधित्व किया । इस कार्यक्रम में हर्ष वर्धन दुबे रायपुर संभाग का प्रतिनिधित्व कर रहे थे । हर्ष वर्धन दुबे ने शास्त्रीय गायन में राग पूरिया धनाश्री में पायलिया झनकार छोटा खयाल की एकल प्रस्तुति देकर 1225 केन्द्रिय विद्यालयों के विद्यार्थियों को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया जिसमे केन्द्रिय विद्यालय झगराखाण्ड के प्रिंसपल वाई.के. सोलंकी का विशेष योगदान रहा जिन्होने हर्ष वर्धन दुबे को पग – पग पर उत्साह वर्धन किया । उनके अटूट विश्वास के कारण ही हर्ष वर्धन अल्प समय होते हुए भी प्रथम स्थान प्राप्त करने में सफल रहे । म्यूजिक टीचर बी . रविन्द्र कुमार ने इस कायकम में अपना सहयोग दिया।

अपनी शानदार सफलता पर हर्षवर्धन ने प्रिंसपल सर का आभार प्रकट करते हुए अपनी इस सफलता का श्रेय अपने गुरू गोपाल प्रजापति एवं अपने माता – पिता को देते हैं।

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