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नक्सलियों ने 1 मार्च की मुठभेड़ को बताया फर्जी, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

दंतेवाड़ा। नक्सलियों की दक्षिण बस्तर डिविजनल कमेटी के सचिव गंगा ने प्रेस नोट जारी कर 1 मार्च को बीजापुर-सुकमा सीमा पर हुई मुठभेड़ को फर्जी करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पामेड़ एरिया कमेटी के सीनियर एसी सदस्य सोड़ी लिंगे और पोड़ियम हड़मा को पकड़कर मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा, तीन अन्य नक्सलियों को हिरासत में लेकर पामेड़ थाने में यातनाएं देने का भी आरोप लगाया गया है।

प्रेस नोट में नक्सलियों ने दावा किया कि सुरक्षाबलों द्वारा की गई यह कार्रवाई एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र थी, जिसके तहत निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि मुठभेड़ पूरी तरह वास्तविक थी और अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की थी।

पहले भी उठा चुके हैं ऐसे सवाल

नक्सली इससे पहले भी मुठभेड़ों को फर्जी करार देते रहे हैं। हाल ही में, 24 फरवरी को सुकमा जिले के बुर्कालंका गांव में हुई मुठभेड़ को भी उन्होंने झूठा बताते हुए आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनके साथी को गांव से पकड़कर मार गिराया। इसी तरह, 22 नवंबर को भेज्जी इलाके में हुई मुठभेड़ को लेकर नक्सलियों ने दावा किया था कि पुलिस ने 10 नक्सलियों के मारे जाने की बात कहकर 6 निर्दोष ग्रामीणों की हत्या कर दी।

सुरक्षा बल सतर्क, अभियान जारी

दक्षिण बस्तर में नक्सली गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने सतर्कता बढ़ा दी है। पुलिस और सुरक्षाबलों का कहना है कि नक्सली अपने मारे गए साथियों की सच्चाई छिपाने के लिए इस तरह के दावे कर रहे हैं। वहीं, आगामी दिनों में और भी बड़े अभियानों की संभावना जताई जा रही है।

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