रायपुर, 06 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके सर्वांगीण विकास को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रायपुर में आज “छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण नीति–2025” के ड्राफ्ट प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ (UNICEF) के सहयोग से आयोजित की गई।
कार्यशाला में बाल विवाह और बाल श्रम की रोकथाम, अनाथ एवं बेसहारा बच्चों के पुनर्वास, बाल तस्करी और हिंसा से सुरक्षा, कुपोषण, उपेक्षा तथा साइबर अपराधों से बच्चों को सुरक्षित रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। नीति के मसौदे पर विशेषज्ञों, हितधारकों और विभागीय अधिकारियों से अंतिम सुझाव लिए गए।
महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने ड्राफ्ट नीति और कार्ययोजना की प्रस्तुति देते हुए बताया कि यह नीति किशोर न्याय अधिनियम 2015, UNCRC तथा अन्य राष्ट्रीय कानूनी प्रावधानों के अनुरूप तैयार की जा रही है, जिसमें राज्य की सामाजिक व भौगोलिक परिस्थितियों का विशेष ध्यान रखा गया है। वहीं, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बाल अधिकारों की निगरानी, शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करने तथा संस्थागत और गैर-संस्थागत देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में संयुक्त सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती फरिहा आलम, संचालक समाज कल्याण श्रीमती रोक्तिमा यादव, संचालक ट्रेजरी एवं अकाउंट्स श्रीमती पद्मिनी भोई साहू, संचालक महिला एवं बाल विकास डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री चेतना देसाई सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, SCPS/DCPS प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्थाएं तथा कानूनी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, बहु-विभागीय समन्वय और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। ड्राफ्ट नीति की समीक्षा के लिए प्रतिभागियों को समूहों में बांटकर विस्तृत चर्चा की गई।
अधिकारियों के अनुसार प्राप्त सुझावों को सम्मिलित करते हुए राज्य बाल संरक्षण नीति–2025 को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ के प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षा और अधिकारों का मजबूत कवच तैयार हो सके।
