रायपुर।
छत्तीसगढ़ में सरकारी तंत्र की गरिमा पर सवाल खड़े करने वाले घटनाक्रम थमने का नाम नहीं ले रहे। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड में हुए अश्लील डांस मामले का विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब सूरजपुर जिले के वन परिक्षेत्र कुलमी से जुड़ा कथित अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से हड़कंप मच गया है। दोनों मामलों ने न केवल सरकारी प्रतिष्ठानों की साख पर दाग लगाया है, बल्कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
मैनपुर के उरमाल गांव में छह दिवसीय ओपेरा कार्यक्रम की अनुमति मनोरंजन के नाम पर ली गई थी, लेकिन उसी अनुमति की आड़ में मंच पर अर्धनग्न डांस, नोट उड़ाने और देर रात तक हंगामे का खुला खेल चलता रहा। हैरानी की बात यह रही कि कार्यक्रम में एसडीएम और पुलिस कर्मचारी मौजूद रहे। वायरल वीडियो के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम को मुख्यालय अटैच तथा दो पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर किया गया। आयोजन समिति के चार लोगों पर अपराध दर्ज कर गिरफ्तार भी किया गया। बावजूद इसके प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह मात्र औपचारिकता तो नहीं?
उधर, सूरजपुर जिले के कुलमी वन परिक्षेत्र से जुड़े एक कथित वीडियो ने नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में रेस्ट हाउस परिसर में अश्लीलता से जुड़ी गतिविधियों के होने का दावा किया जा रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिन परिसरों में अनुशासन, मर्यादा और सरकारी गरिमा की मिसाल पेश होनी चाहिए, वहीं अगर अशोभनीय हरकतें होती दिखाई दें, तो आम जनता से कैसी उम्मीद की जा सकती है?
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने प्रशासनिक जिम्मेदारी, अनुशासन और कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। क्या उच्च स्तर पर कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई होगी या फिर मामले औपचारिक फाइलों में दबकर रह जाएंगे—यह देखने वाली बात होगी।
