रायपुर। राजधानी में ड्रग्स के बढ़ते कारोबार पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इस बार कोई बाहरी तस्कर नहीं, बल्कि खुद पुलिस विभाग का सिपाही नशे की सप्लाई करते पकड़ा गया है। सिपाही हिमांशु बर्मन की गिरफ्तारी ने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक आरोपी सिपाही दिल्ली और पंजाब से ड्रग्स मंगवाकर रायपुर में सप्लाई कर रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह वर्दी में रहकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था। सवाल उठता है कि आखिर यह खेल कब से चल रहा था? और क्या विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी?
राजधानी में आए दिन ड्रग्स पकड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। युवाओं की पार्टियों में नशे का खुला खेल, स्कूल-कॉलेज के छात्रों तक पहुंचती खेप और अब पुलिसकर्मी का शामिल होना — यह संकेत है कि नेटवर्क गहराई तक फैल चुका है। क्या यह सब बिना संरक्षण के संभव है?
सिपाही की गिरफ्तारी के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ड्रग्स खरीदने वाले और सप्लाई चेन से जुड़े बड़े नाम सामने आएंगे या नहीं। क्या इस बार सचमुच पूरा नेटवर्क उजागर होगा या मामला एक गिरफ्तारी तक सीमित रह जाएगा?
राजधानी की सड़कों पर अगर नशे का जाल फैल रहा है, तो यह सिर्फ कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक भविष्य का संकट है। क्योंकि नशा युवाओं के सपनों को निगल रहा है।
सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए यह अग्निपरीक्षा है। अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो युवा पीढ़ी को बचाएगा कौन?
