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राज्योत्सव की पहली सांस्कृतिक शाम में सुरों का जादू, पलक मुच्छल के गीतों पर झूम उठा रायपुर

अनुराग शर्मा और आरू साहू ने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों से जमाया रंग, रिदम क्वीन बैंड और महाराष्ट्र की लावणी ने भी बांधा समां

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की पहली सांस्कृतिक संध्या गीत-संगीत और नृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियों के नाम रही। मंच पर जहां छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति की मिठास सुनाई दी, वहीं बॉलीवुड के सुरीले गीतों ने भी दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। अनुराग शर्मा, आरू साहू और बॉलीवुड की मशहूर पार्श्व गायिका पलक मुच्छल की प्रस्तुतियों ने शाम को यादगार बना दिया।

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक अनुराग शर्मा ने अपने चर्चित गीत ‘गीत कोनो गाहु तोर नाम के’ से की। छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की मिठास और उनकी आवाज ने कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ दिया। तालियों की गूंज के बीच उनकी प्रस्तुति ने शाम का माहौल सुरमय बना दिया।

इसके बाद रिदम क्वीन बैंड ने अपनी संगीतमय प्रस्तुति से मंच पर ऊर्जा और उत्साह भर दिया। कलाकारों के शानदार तालमेल और संगीत की आकर्षक धुनों ने दर्शकों का मनोरंजन किया।

महाराष्ट्र की लावणी ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग

राज्योत्सव के मंच पर महाराष्ट्र की पारंपरिक लावणी नृत्य प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक वेशभूषा, शानदार भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध नृत्य ने दर्शकों को महाराष्ट्र की समृद्ध लोक परंपरा की झलक दिखाई। अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने एक मंच पर भारत की विविधता का संदेश दिया।

आरू साहू के गीतों पर झूमे दर्शक

छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय लोक गायिका आरू साहू ने भक्तिमय गीत से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक छत्तीसगढ़ी लोकगीत प्रस्तुत कर दर्शकों को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। उनकी मधुर आवाज और गीतों पर दर्शकों ने तालियों के साथ खूब उत्साह दिखाया।

पलक मुच्छल की आवाज ने बांधा समां

सांस्कृतिक संध्या का विशेष आकर्षण बॉलीवुड की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका पलक मुच्छल रहीं। उनके लोकप्रिय फिल्मी गीतों की प्रस्तुति पर युवा दर्शक खासे उत्साहित नजर आए। उनकी सुरीली आवाज और मंचीय अंदाज ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। देर शाम तक दर्शक संगीत की धुनों का आनंद लेते रहे।

कुल मिलाकर राज्योत्सव की यह सांस्कृतिक शाम छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और देश के अलग-अलग हिस्सों की कला का खूबसूरत संगम बनी। लोकगीतों से लेकर बॉलीवुड संगीत और पारंपरिक नृत्य तक, हर प्रस्तुति ने दर्शकों के लिए यादगार अनुभव तैयार किया।

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