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हिड़मा की मौत पर माओवादी नाराज़, 23 नवंबर को देशव्यापी प्रतिरोध दिवस का ऐलान


सेंट्रल कमेटी ने प्रेस नोट जारी कर सुरक्षा बलों पर सरेंडर विफल होने के बाद हत्या का लगाया आरोप


सुकमा। कुख्यात नक्सली कमांडर और माओवादी संगठन की पीएलजीए बटालियन-1 का चीफ माड़वी हिड़मा मुठभेड़ में ढेर होने के बाद अब माओवादी संगठनों ने इसकी मौत को “हत्या” करार देते हुए 23 नवंबर को देशव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाने की घोषणा की है। नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के प्रवक्ता अभय ने प्रेस नोट जारी कर सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि हिड़मा को पहले जीवित पकड़ा गया और सरेंडर कराने की कोशिश की गई, लेकिन जब यह योजना विफल रही तो उसे मार डाला गया।


माओवादी कमेटी का दावा—“इलाज के लिए विजयवाड़ा गया था हिड़मा”


प्रवक्ता अभय द्वारा जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि हिड़मा 18 नवंबर को इलाज के लिए विजयवाड़ा गया था। इसी दौरान उसे सुरक्षा एजेंसियों ने दबोच लिया। प्रेस नोट में यह दावा भी किया गया है कि अधिकारियों ने हिड़मा को सरेंडर करवाने के लिए दबाव बनाया, लेकिन बात न बनने पर उसे फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया।
संगठन ने आरोप लगाया है कि इसी प्रक्रिया में 6 अन्य नक्सलियों की भी हत्या की गई और बाद में घटना को मुठभेड़ का रूप दिया गया।


सुरक्षा एजेंसियों का आधिकारिक बयान

—“सफल ऑपरेशन, शीर्ष कमांडर ढेर”
दूसरी ओर, सुरक्षा बलों ने इसे अब तक की सबसे बड़ी सफलता बताते हुए कहा था कि 18 नवंबर को आंध्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर सुरक्षा अभियान के दौरान हिड़मा समेत कई हार्डकोर नक्सली मार गिराए गए। हिड़मा के सिर पर करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपए का इनाम था और वह झीरम घाटी समेत 26 से अधिक बड़े हमलों में मास्टरमाइंड माना जाता था।


23 नवंबर को प्रतिरोध दिवस का ऐलान—बस्तर में हाई अलर्ट


नक्सल संगठनों ने 23 नवंबर को देशभर में प्रतिरोध दिवस मनाने की बात कही है। इसके बाद बस्तर संभाग को लेकर सुरक्षा एजेंसियों में सतर्कता बढ़ गई है।
सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और कांकेर में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की जा सकती है।
सड़क निर्माण, रेलवे ट्रैक और पुलिस कैंपों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में भी गश्त तेज करने और मूवमेंट को सीमित रखने के निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
हिड़मा की मौत—20 साल के नक्सली नेटवर्क को बड़ी चोट


हिड़मा पिछले दो दशकों से बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की सैन्य रणनीति का केंद्र रहा। पीएलजीए बटालियन-1 का कमांडर होने के नाते वह कई बड़े हमलों का मुख्य संचालक था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसके मारे जाने के बाद नक्सली संगठन की ऑपरेशनल क्षमता पर बड़ा असर पड़ेगा, हालांकि प्रतिरोध दिवस के नाम पर किसी घटना की आशंका को देखते हुए तैयारी बढ़ा दी गई है।

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