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मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी पर पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर का तीखा हमला, मुख्य चुनाव आयुक्त को सौंपा विस्तृत ज्ञापन


रायपुर। राजधानी में मतदाता सूची में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। बड़ी संख्या में नाम कटने और संशोधन प्रक्रिया में अव्यवस्था के खिलाफ मंगलवार को पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर ने प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति गंभीर लापरवाही बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।


ढेबर ने कहा कि मतदाता सूची में हो रही त्रुटियाँ मात्र तकनीकी भूल नहीं, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक मतदान अधिकार पर सीधा आघात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की लापरवाही से हजारों लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं, जिसका सीधा असर चुनावी पारदर्शिता पर पड़ रहा है।


ज्ञापन में बताया गया कि 2003 से निरंतर मतदान करने वाले हजारों मतदाताओं के नाम इस वर्ष बिना किसी कारण, सूचना या सत्यापन के अचानक सूची से गायब पाए गए। ढेबर ने इसे चौंकाने वाली और अस्वीकार्य चूक बताते हुए कहा कि इतने अनुभवी और पंजीकृत मतदाताओं का एकसाथ सूची से हटना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है और इससे आयोग की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।


इसके अलावा SIR (Special Revision) फॉर्म प्रक्रिया को लेकर भी शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। ज्ञापन के अनुसार, नागरिकों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से फॉर्म भरे, लेकिन किसी को पावती रसीद नहीं मिली। आवेदन की स्थिति को ट्रैक करने का भी कोई सिस्टम मौजूद नहीं है। ढेबर ने कहा कि बिना पावती के नागरिक यह साबित भी नहीं कर पा रहे कि उन्होंने समय पर आवेदन जमा किया था, जिससे लोग और अधिक असहाय हो रहे हैं।


मतदाता सूची से नाम कटने के बाद नागरिकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके लिए कोई अलग पोर्टल, मॉड्यूल या हेल्पडेस्क उपलब्ध नहीं है। न तो शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया स्पष्ट है और न ही यह जानकारी दी जा रही कि नाम पुनः जोड़ने के लिए किस स्तर पर संपर्क किया जाए। ढेबर ने कहा कि यह स्थिति मतदाताओं में व्यापक भ्रम और निराशा पैदा कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है।
ढेबर ने अपने ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखीं—
पहला, प्रभावित इलाकों में तत्काल विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाया जाए।


दूसरा, SIR फॉर्म भरने पर स्वीकृति पावती अनिवार्य की जाए।
तीसरा, नाम कटने वाले मतदाताओं के लिए एक अलग हेल्पडेस्क या पोर्टल बनाया जाए।
और चौथा, पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाया जाए ताकि हर नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का भरोसा मिल सके।


ढेबर ने कहा कि मतदाता सूची में त्रुटियाँ किसी भी लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा होती हैं। उन्होंने कहा, “हर नागरिक का वोट उसकी आवाज़ है। इस आवाज़ को खामोश होने नहीं दिया जाएगा। चुनाव आयोग को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे ताकि लोगों का भरोसा बरकरार रह सके।”


इसके साथ उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग जनता की चिंता समझते हुए शीघ्र कार्रवाई करेगा, ताकि आगामी चुनावों में कोई भी पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित न हो।

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