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देवकीनंदन ठाकुर की श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ, पहले दिन उमड़ा आस्था का सैलाब


‘नो तिलक, नो एंट्री’ की व्यवस्था रही आकर्षण का केंद्र, धर्म, संस्कार और निस्वार्थ सेवा का दिया संदेश


रायपुर। राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में मंगलवार से पूज्य देवकीनंदन ठाकुर के सानिध्य में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। व्यासपीठ से कथा प्रारंभ होते ही पूरा पंडाल “जय श्री राधे-राधे” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए।


कथा संयोजक योगेश अग्रवाल ने बताया कि दीप प्रज्ज्वलन के साथ कथा का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर संजय अग्रवाल, ममता साहू, शालिनी राजपूत तथा कृतिका जैन सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।


प्रथम दिवस की कथा में “नो तिलक, नो एंट्री” की व्यवस्था विशेष चर्चा का विषय रही। इस संबंध में महाराज श्री ने कहा कि तिलक भारतीय संस्कृति में श्रद्धा, पवित्रता और भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से तिलक लगाकर कथा स्थल पर आने का आग्रह किया। कथा पंडाल में अधिकांश श्रद्धालु तिलक धारण किए हुए दिखाई दिए।


अपने प्रवचन में महाराज श्री ने कहा कि कलियुग में मानव का वास्तविक कल्याण श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से ही संभव है। भागवत कथा मनुष्य के जीवन में धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार करती है तथा उसे ईश्वर से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ कथा सुनने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।


महाराज श्री ने श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय बालिका के साथ हुई जघन्य घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ते अपराधों का कारण संस्कारों का क्षरण है। घर-घर में रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता और अन्य सनातन ग्रंथों का अध्ययन होगा तो बच्चों और युवाओं में नैतिक संस्कार विकसित होंगे तथा अपराधों में कमी आएगी।


उन्होंने कहा कि केवल मंगलवार को मांस और शराब का त्याग करना पर्याप्त नहीं है। यदि कोई कार्य एक दिन अनुचित है, तो वह अन्य दिनों में भी अनुचित ही रहेगा। सच्ची भक्ति का अर्थ है कि व्यक्ति हर दिन सात्विक जीवन अपनाए और नशे तथा हिंसा जैसी बुरी आदतों से दूर रहे।


महाराज श्री ने हनुमान के जीवन को निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च उदाहरण बताते हुए कहा कि सेवा बिना किसी सम्मान या प्रसिद्धि की अपेक्षा के करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कार उपदेश से नहीं, बल्कि माता-पिता के आचरण से प्राप्त होते हैं। यदि परिवार में धर्म, पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और भारतीय संस्कृति का पालन होगा तो नई पीढ़ी भी उन्हीं मूल्यों को अपनाएगी।


सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 8 से 14 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

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