बिलासपुर। बहुचर्चित फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट मामले में अपोलो अस्पताल प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है। सरकण्डा पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ न्यायालय में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी है। पुलिस जांच में अस्पताल प्रबंधन अथवा चयन समिति की ओर से किसी प्रकार की आपराधिक साजिश या मिलीभगत के ठोस साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई है।
पुलिस के अनुसार जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन के दस्तावेजों, भर्ती प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की गई, लेकिन ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि अस्पताल प्रबंधन ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपी डॉक्टर की नियुक्ति कराई थी। इसी आधार पर प्रबंधन के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की गई है।
वहीं मामले के मुख्य आरोपी डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव के खिलाफ कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी। आरोपी पर फर्जी पहचान और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में नौकरी हासिल करने का आरोप है। इस मामले में पुलिस पहले ही उसके खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में पेश कर चुकी है।
जांच के दौरान आरोपी को दमोह से प्रोडक्शन वारंट पर बिलासपुर लाकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ में उसने कई मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी करने की बात स्वीकार की। हालांकि वह एमबीबीएस की डिग्री के अलावा कार्डियोलॉजी विशेषज्ञता से संबंधित कोई वैध डिग्री या प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका।
पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, धोखाधड़ी और कूटरचना से जुड़े आरोपों में न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। वहीं अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
