राकेश कन्नौजिया की रिपोर्ट…
बलरामपुर। शिक्षा विभाग में 4 करोड़ 51 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर प्रकाशित खबर के बाद प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न ग्रुपों में खबर के समर्थन और खंडन से जुड़ी पोस्ट साझा किए जाने की चर्चा है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर प्रेस विज्ञप्ति जारी किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामले में सबसे अधिक चर्चा कलेक्टर के लेटरपैड पर हस्ताक्षर से जुड़े कथित विवाद को लेकर है। ऐसे गंभीर विषय में प्रभारी DEO की ओर से स्वयं खंडन जारी किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि मामला प्रशासनिक जांच से जुड़ा है, तो इसकी स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी सक्षम प्रशासनिक स्तर से सामने आनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि प्रकाशित खबर किसी व्यक्तिगत विवाद के आधार पर नहीं, बल्कि जांच में सामने आए कथित तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर उठाए गए सवालों से जुड़ी है। ऐसे में अब पूरा मामला जांच की निष्पक्षता और उसके निष्कर्ष पर केंद्रित हो गया है।
प्रभारी DEO मनीराम यादव के पूर्व कार्यकाल को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। बलरामपुर में उनके कार्यकाल को लेकर सामने आ रहे आरोपों के बीच अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है।
सवाल यह भी है कि यदि विभागीय कामकाज और वित्तीय मामलों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, तो उनका जवाब सोशल मीडिया पोस्ट और प्रेस विज्ञप्तियों से दिया जाएगा या फिर जांच के दस्तावेज और आधिकारिक रिपोर्ट ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे?
फिलहाल 4 करोड़ 51 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला चर्चा में है और अब निगाहें प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
