Advertisement Carousel

आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई, दो अस्पतालों का लाइसेंस निरस्त

Business concept.

फर्जी मरीज भर्ती दिखाकर क्लेम और कमीशनखोरी के आरोपों की जांच में पुष्टि, स्वास्थ्य विभाग ने कई अस्पतालों में की कार्रवाई

रायपुर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत फर्जीवाड़े और अनियमितताओं की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर के निजी अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद मेड लाइफ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और लोटस हॉस्पिटल एंडवांस यूरोलॉजी सेंटर का नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत होने वाले इलाज, मरीजों की भर्ती और शासन को भेजे जाने वाले क्लेम की प्रक्रिया एक बार फिर जांच के दायरे में आ गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाने, उपचार से संबंधित गलत क्लेम प्रस्तुत करने और कमीशनखोरी जैसी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

शिकायतों के बाद गठित की गई थी जांच कमेटी

जानकारी के अनुसार, आयुष्मान योजना के तहत कुछ निजी अस्पतालों में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार शिकायतें स्वास्थ्य विभाग तक पहुंच रही थीं। शिकायतों में ऐसे मरीजों के नाम पर भी योजना के तहत क्लेम किए जाने की बात सामने आई थी, जिनके अस्पताल में भर्ती होने और उपचार को लेकर सवाल उठे थे।

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच कमेटी गठित की। कमेटी ने संबंधित अस्पतालों में पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की और आयुष्मान योजना के तहत किए गए क्लेम से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले। मरीजों की भर्ती, उपचार, डिस्चार्ज और योजना के तहत प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया।

छह अस्पतालों में हुई जांच

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रायपुर के श्री अनंत साईं हॉस्पिटल, श्री महावीर अस्पताल-मोवा, वरदान हॉस्पिटल, मेड लाइफ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लोटस हॉस्पिटल एंडवांस यूरोलॉजी सेंटर और रावतपुरा हॉस्पिटल में कार्रवाई की।

टीम ने अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत भर्ती किए गए मरीजों से संबंधित रिकॉर्ड और शासन को भेजे गए क्लेम की जांच की। इसके अलावा अस्पतालों में मरीजों की भर्ती और उपचार से जुड़े दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया।

दो अस्पतालों पर सबसे बड़ी कार्रवाई

जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मेड लाइफ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और लोटस हॉस्पिटल एंडवांस यूरोलॉजी सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की गई। दोनों अस्पतालों का नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर इंद्रजीत बर्मन के मुताबिक, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार, जांच कमेटी गठित कर अस्पतालों में छापामार कार्रवाई की गई थी और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई।

फर्जी मरीज और कमीशनखोरी की बात आई सामने

विभागीय अधिकारी के अनुसार जांच के दौरान फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाने और कमीशनखोरी से संबंधित गड़बड़ियां सामने आई हैं। आयुष्मान योजना में मरीजों के इलाज का खर्च शासन की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत वहन किया जाता है। ऐसे में फर्जी भर्ती या गलत क्लेम से सरकारी योजना की राशि के दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है।

स्वास्थ्य विभाग ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की है। हालांकि, अलग-अलग मामलों में किस मरीज के नाम पर कितना क्लेम किया गया और उससे शासन को कितनी आर्थिक क्षति हुई, इसका विस्तृत आंकड़ा फिलहाल सामने नहीं आया है।

अन्य अस्पताल भी जांच के दायरे में

इस कार्रवाई के बाद अन्य अस्पतालों में भी आयुष्मान योजना के तहत किए गए क्लेम की जांच जारी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण कर रही है। जांच में यदि और अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से यह संकेत मिला है कि आयुष्मान योजना के तहत फर्जी भर्ती, गलत दस्तावेज या अनियमित क्लेम से जुड़े मामलों में अब सख्ती बरती जा रही है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद अन्य अस्पतालों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

योजना की पारदर्शिता पर जोर

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उद्देश्य पात्र मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना के तहत होने वाली किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे पात्र हितग्राहियों और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों के रिकॉर्ड की जांच और दोष पाए जाने पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई किए जाने से निजी अस्पतालों में योजना के संचालन की निगरानी को लेकर भी सख्ती बढ़ने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!