FCI और मार्कफेड की भूमिका पर अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने उठाए सवाल, CVC-EOW में शिकायत और हाईकोर्ट में PIL दायर करने का ऐलान
रायपुर, 29 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग चावल की गुणवत्ता और सरकारी धान उपार्जन व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI) के रायपुर मंडल कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से अब तक 77,402.25 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस को अमानक बताकर खारिज किया गया है। इस आंकड़े के सामने आने के बाद चावल की रिकवरी, जिम्मेदार मिलरों पर कार्रवाई और विभागीय निगरानी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
अधिवक्ता, राजनेता और RTI कार्यकर्ता मनोज सिंह ठाकुर ने इस मामले में FCI और मार्कफेड की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि इतनी बड़ी मात्रा में चावल खारिज होने के बावजूद कार्रवाई, नुकसान की भरपाई और जिम्मेदारी तय करने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
77 हजार टन चावल खारिज, हिसाब-किताब पर सवाल
ठाकुर के अनुसार, FCI के रायपुर मंडल कार्यालय से मिले जवाब में 77,402.25 मीट्रिक टन चावल को अमानक बताकर खारिज किए जाने की जानकारी दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया है कि खारिज किए गए चावल के मामले में संबंधित मिलरों से मानक चावल की दोबारा आपूर्ति, आर्थिक नुकसान की भरपाई और अन्य विभागीय कार्रवाई का क्या रिकॉर्ड है।
उनका कहना है कि मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कितना चावल किस कारण से खारिज हुआ, संबंधित मिलरों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और सरकारी हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए।
विजिलेंस जांच नहीं होने पर भी उठाए सवाल
मनोज सिंह ठाकुर ने अपने दावे के अनुसार, FCI के जवाब में केंद्रीय सतर्कता दल की ओर से जांच या निरीक्षण नहीं किए जाने का उल्लेख होने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में चावल खारिज होने के मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि गुणवत्ता संबंधी कमियों और संभावित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि चावल की गुणवत्ता और भंडारण से जुड़ी समस्याओं का असर धान उठाव तथा उपार्जन व्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि, इन आशंकाओं की पुष्टि संबंधित विभागों के रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच से ही हो सकेगी।
FIR और बैंक गारंटी पर कार्रवाई की मांग
ठाकुर ने मामले में संबंधित मिलरों की भूमिका की जांच, बैंक गारंटी जब्त करने और आवश्यक होने पर FIR दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या आपराधिक कृत्य सामने आता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित एजेंसियों ने मामले में प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो वे केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW/ACB) में दस्तावेजों के साथ शिकायत करेंगे। इसके अलावा, मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की बात भी कही है।
विभागों का पक्ष आना बाकी
यह मामला सरकारी खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच, कस्टम मिलिंग व्यवस्था में जवाबदेही और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़ा है। हालांकि, अमानक चावल की मात्रा सामने आने मात्र से भ्रष्टाचार या आपराधिक मिलीभगत साबित नहीं होती। इसके लिए चावल खारिज किए जाने के कारणों, संबंधित मिलरों के रिकॉर्ड, रिकवरी की स्थिति और विभागीय कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
इस संबंध में FCI, मार्कफेड और संबंधित राज्य एजेंसियों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
प्रमुख तथ्य: RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से अब तक FCI रायपुर मंडल में 77,402.25 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस अमानक बताकर खारिज किया गया। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने इस मामले में जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
